जयपुर: पिलानी विधायक पितराम सिंह काला ने राजस्थान विधानसभा में नियम-50 के तहत पिलानी में सरकारी कॉलेज खोलने की मांग को लेकर स्थगन प्रस्ताव रखा। एमके साबू कॉलेज के अधिग्रहण की मांग तेज होने से विद्यार्थियों और अभिभावकों को बड़ी राहत की उम्मीद।
राजस्थान की राजनीति में पिलानी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पिलानी विधायक पितराम सिंह काला ने राजस्थान विधानसभा में नियम-50 के अंतर्गत स्थगन प्रस्ताव रखते हुए पिलानी में सरकारी कॉलेज खोलने की मांग को मजबूती से उठाया। उन्होंने कहा कि पिलानी विधानसभा मुख्यालय होने के बावजूद यहां 18 किलोमीटर के दायरे में कोई सरकारी महाविद्यालय नहीं है, जो विद्यार्थियों के साथ गंभीर अन्याय है।
पितराम सिंह काला ने सदन में कहा कि पिलानी क्षेत्र में लगभग 45 निजी एवं सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं, जहां से हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए निकलते हैं, लेकिन सरकारी कॉलेज के अभाव में उन्हें मजबूरी में निजी संस्थानों में अधिक शुल्क देकर पढ़ाई करनी पड़ती है।
विधानसभा में मुद्दा उठाते हुए पितराम सिंह काला ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, किसान, मजदूर और व्यापारी वर्ग के परिवारों के छात्र-छात्राओं को अधिक शुल्क वहन करना पड़ता है। दूरस्थ क्षेत्रों में कॉलेज न होने के कारण छात्राओं पर विशेष रूप से अतिरिक्त आर्थिक और सामाजिक भार पड़ता है।
निजी महाविद्यालयों की ऊंची फीस के कारण कई विद्यार्थियों को बीच में ही पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यह स्थिति शिक्षा के अधिकार और समान अवसर की भावना के विपरीत है।
पिलानी में पूर्व में एमके साबू कॉलेज के नाम से निजी महाविद्यालय संचालित था। यह भवन अनुदान से निर्मित हुआ था और लंबे समय तक यहां शिक्षण व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रही। वर्तमान में इस कॉलेज को बंद कर दिया गया है, जिससे क्षेत्र के विद्यार्थियों में निराशा है।
पितराम सिंह काला ने सदन में आरोप लगाया कि कॉलेज के मालिक साबू सेठ इस महाविद्यालय को भू-माफियाओं को बेचने की मंशा रखते हैं, जिससे पिलानी के छात्र-छात्राओं के शिक्षा के अधिकार पर कुठाराघात होगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की कि राज्य सरकार तत्काल कार्रवाई करते हुए एमके साबू कॉलेज का अधिग्रहण करे और इसे सरकारी कॉलेज के रूप में संचालित करे।
विधायक पितराम सिंह काला ने कहा कि कॉलेज परिसर में भवन और जमीन की सभी सुविधाएं पहले से मौजूद हैं, ऐसे में सरकार को नया ढांचा खड़ा करने की आवश्यकता नहीं होगी। यदि एमके साबू कॉलेज का अधिग्रहण कर इसे सरकारी महाविद्यालय में परिवर्तित किया जाता है तो हजारों विद्यार्थियों को राहत मिल सकती है।
उन्होंने सदन के माध्यम से सरकार से अपील की कि विद्यार्थियों और अभिभावकों के हित में शीघ्र निर्णय लिया जाए, ताकि पिलानी में उच्च शिक्षा का मार्ग प्रशस्त हो सके।
पिलानी में सरकारी कॉलेज की मांग अब केवल शैक्षणिक मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन चुकी है। यदि सरकार इस पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो यह क्षेत्र के युवाओं के भविष्य के लिए निर्णायक कदम साबित हो सकता है।





