जयपुर : राजस्थान सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के तबादलों को लेकर बड़ी पहल की है। सरकार एक नई ट्रांसफर पॉलिसी ला रही है, जिसके तहत कर्मचारियों को तबादले से पहले तीन साल तक एक ही जगह काम करना होगा। साथ ही, सभी कर्मचारियों को कम से कम दो साल ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देनी होगी।
पीएम मोदी की नसीहत के बाद हुई पहल
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस नसीहत के बाद की गई है, जो उन्होंने जयपुर दौरे के दौरान विधायकों को दी थी। पीएम मोदी ने कहा था कि वे तबादलों के चक्कर में न पड़ें। सरकार किसी भी पार्टी की हो, कर्मचारियों को सरकार की योजनाओं को धरातल पर क्रियान्वित करना ही पड़ता है।
सभी विभागों से मांगे सुझाव
राज्य सरकार ने सभी विभागों से इस पॉलिसी को लेकर सुझाव मांगे हैं। विभागों के प्रमुख अपने अधिकारियों से चर्चा कर सरकार को सुझाव देंगे। सभी विभागाध्यक्षों की ओर से सुझाव आने के बाद राज्य सरकार उन पर विचार करेगी और फिर इस पॉलिसी को लागू करेगी।
विवादों से छुटकारा चाहती है सरकार:
विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों की सिफारिश पर होने वाले हजारों ट्रांसफर के बाद कई बार विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। कई अधिकारी सरकार की ओर से किए गए ट्रांसफर को कोर्ट में चुनौती देते हैं। कई प्रकरणों में कोर्ट तबादलों पर कोर्ट स्टे दे देता है या कई बार निरस्त भी कर देता है। इससे सरकार की किरकिरी होती है। विवादित तबादलों से जनप्रतिनिधियों और अफसरों के बीच टकराव की स्थिति भी बनती है। ऐसे प्रपंचों से बचने के लिए सरकार नई पॉलिसी लाने की तैयारी कर रही है।
राजस्थान में तबादले की प्रक्रिया
कॉमन एसओपी के अनुसार, कर्मचारियों के ट्रांसफर से पहले सभी विभागों से ऑनलाइन आवेदन मांगे जाएंगे। अधिकारी-कर्मचारी इच्छानुसार खाली पद के लिए ट्रांसफर आवेदन कर सकेंगे। संबंधित विभाग की टीम उनकी काउंसलिंग करेगी। काउंसलिंग में दिव्यांग, विधवा, भूतपूर्व सैनिक, उत्कृष्ट खिलाड़ी, एकल महिला, पति-पत्नी प्रकरण, असाध्य रोग से पीड़ित, शहीद के आश्रित सदस्य और दूरस्थ इलाकों में तीन साल से कार्यरत कर्मचारियों को प्राथमिकता मिलेगी।
यहां लागू नहीं होगी एसओपी
राजस्थान की SOP राजभवन, विधानसभा सचिवालय और राज्य निर्वाचन आयोग में लागू नहीं होगी। शेष सभी विभागों में इसी के आधार पर तबदले किए जाएंगे। जिस डिपार्टमेंट में 2 हजार से कम कर्मचारी हैं, वहां एसओपी ऐसे ही लागू की जाएगी, लेकिन 2 हजार से ज्यादा कर्मचारी वाले विभागों में सुविधा अनुसार सुझाव शामिल कर पॉलिसी तैयार कर प्रशासनिक सुधार एवं समन्वयक विभाग को भेजनी होगी।
पोर्टल पर मिलेगी खाली पदों की सूची
एसओपी के अनुसार, हर विभाग 1 से 15 जनवरी के बीच जिले, उपखण्ड या पंचायत वार खाली पदों की सूची पोर्टल पर अपलोड करेंगे। कर्मचारी 1 से 28 फरवरी तक ट्रांसफर के लिए आवेदन करेंगे। विभाग 30 मार्च तक काउंसलिंग कर प्राथमिकता और नियम के अनुसार 30 अप्रैल तक ट्रांसफर सूची जारी करेगा।
नई पॉलिसी के मुख्य बिंदु:
- 3 साल से पहले नहीं होगा कोई तबादला
- सभी कर्मचारियों को 2 साल ग्रामीण क्षेत्रों में काम करना होगा
- विवादों से छुटकारा पाना चाहती है सरकार
सरकार को इस कदम से कई फायदे होने की उम्मीद है:
- कर्मचारियों को एक जगह स्थायी रूप से काम करने का मौका मिलेगा
- ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी
- तबादलों को लेकर होने वाले विवादों में कमी आएगी
हालांकि, इस पॉलिसी को लेकर कुछ चिंताएं भी हैं:
- ग्रामीण क्षेत्रों में कर्मचारियों को रहने और काम करने की सुविधाओं की कमी
- शहरी क्षेत्रों में कर्मचारियों की कमी
यह नीति कर्मचारियों और अधिकारियों तथा आमजन के लिए फायदेमंद होगी या नहीं, यह तो समय ही बताएगा।





