चिड़ावा: शहर में संचालित एचएमटी फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड शाखा के दो कर्मचारियों पर कंपनी की लाखों रुपये की राशि गबन करने का गंभीर आरोप लगा है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चिड़ावा के आदेश के बाद चिड़ावा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला कंपनी के ग्राहकों से वसूली गई मासिक किश्तों को कंपनी खाते में जमा नहीं करवाने से जुड़ा है।

ग्राहकों से राशि वसूली, लेकिन कंपनी खाते में नहीं करवाई जमा
परिवाद के अनुसार एचएमटी फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि अनिल कुमार जाट पुत्र भीमसिंह निवासी फतेहपुर, तहसील बानसुर जिला अलवर ने न्यायालय में परिवाद पेश किया। कंपनी की चिड़ावा शाखा में रामचन्द पुत्र सुरेश कुमार निवासी ग्राम धिंधवा अधुणा, तहसील पिलानी जिला झुंझुनूं और हवासिंह पुत्र दिलीप सिंह निवासी झाझड़ियों का मोहल्ला, बुडानिया तहसील चिड़ावा कार्यरत थे।

परिवाद में बताया गया कि दोनों आरोपित ग्राहकों से नकद मासिक किश्तें वसूलकर कंपनी खाते में जमा करवाने और उसकी सूचना व्हाट्सएप समूह में साझा करने का कार्य करते थे। आरोप है कि फरवरी 2024 के बाद दोनों ने आपसी साजिश कर ग्राहकों से राशि तो वसूल की, लेकिन उसे कंपनी खाते में जमा नहीं करवाया।

ऑडिट में सामने आया 2.58 लाख रुपये का बकाया
कंपनी की आंतरिक जांच और हिसाब-किताब के दौरान सामने आया कि हवासिंह के पास 1 लाख 47 हजार 960 रुपये तथा रामचन्द के पास 1 लाख 10 हजार 170 रुपये कंपनी के बकाया निकले। परिवाद में कहा गया कि दोनों कर्मचारियों ने पहले राशि जमा करवाने का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में साफ इनकार कर दिया।

कंपनी प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि 14 जुलाई 2025 को राशि जमा कराने की बात कहने पर दोनों आरोपितों ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया और धमकी दी कि कंपनी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती।

चिड़ावा थाना पुलिस ने शुरू की जांच
परिवाद पर सुनवाई के बाद अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चिड़ावा ने प्रथम दृष्टया मामला आपराधिक न्यास भंग और गबन का माना। न्यायालय ने चिड़ावा थाना पुलिस को भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2), 318(4), 336(3) और 339 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए।

इसके बाद चिड़ावा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच एएसआई बलबीर सिंह चावला को सौंप दी है।
पहले भी पुलिस को दी गई थी शिकायत
परिवाद के अनुसार कंपनी की ओर से 27 अगस्त 2025 को चिड़ावा थाने में लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर मामला पुलिस अधीक्षक झुंझुनूं तक पहुंचाया गया। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर कंपनी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।





