नई दिल्ली: भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो पर DGCA ने 22.2 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना घोषित किया है। दिसंबर 2025 में लगातार रद्दीकरण और देरी से परेशान यात्रियों की शिकायतें आसमान छू गई थीं। सिर्फ तीन दिनों में एयरलाइन की उड़ान व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई और हजारों परिवार हवाई अड्डों पर फंस गए। अब कार्रवाई के बाद बड़ा सवाल यह है कि क्या इंडिगो इस झटके से उबर पाएगी और क्या यह फैसला भविष्य की उड़ानों को सुरक्षित बना पाएगा।
DGCA की बड़ी कार्रवाई: परिचालन ढहने पर कड़ा दंड
विमानन नियामक DGCA ने इंडिगो को दिसंबर 2025 में हुए फ्लाइट संकट के लिए जिम्मेदार मानते हुए 22.2 करोड़ रुपये का फाइन लगाया है। DGCA के आदेश के अनुसार 3 से 5 दिसंबर के बीच इंडिगो की 2,507 उड़ानें रद्द और 1,852 उड़ानें देरी से चलीं। इस दौरान करीब तीन लाख यात्री दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता समेत प्रमुख एयरपोर्ट पर फंसे रहे और एयरलाइन की सेवाओं पर सवाल उठे।
DGCA ने मैनेजमेंट को चेताया: CEO से COO तक जिम्मेदारी तय
DGCA ने पाया कि एयरलाइन प्रबंधन उड़ानों की बढ़ती मांग, मौसम प्रभाव और पायलट-क्रू नियमों के बदलाव के लिए तैयार नहीं था। नियामक ने इंडिगो के CEO को संकट प्रबंधन और फ्लाइट ऑपरेशंस में कमजोर निगरानी के लिए कॉशन जारी किया है। COO और अकाउंटेबल मैनेजर को विंटर शेड्यूल तथा नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों का गलत आकलन करने पर आधिकारिक चेतावनी दी गई है।
क्यों फंसा सिस्टम? DGCA जांच में सामने आए छिपे कारण
चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने विस्तृत समीक्षा कर रिपोर्ट सौंपी। जांच में खुलासा हुआ कि एयरलाइन लगातार क्रू, विमान और रूट नेटवर्क का अधिकतम उपयोग करने की रणनीति पर चल रही थी। रोस्टर बफर घटाया गया, रिकवरी मार्जिन सीमित हुए और नए नियम लागू होने के बावजूद समय पर सुधार नहीं किए गए। समिति ने कहा कि परिचालन के अत्यधिक अनुकूलन और सॉफ्टवेयर सपोर्ट की कमी से एयरलाइन कुछ घंटों में डोमिनो प्रभाव का शिकार बन गई।
इंडिगो का जवाब: सुधार और विश्वास बहाली का वादा
इंडिगो ने DGCA के आदेश को स्वीकार करते हुए दावा किया कि एयरलाइन प्रबंधन फैसले का पूर्ण संज्ञान ले चुका है और सुधार लागू कर रहा है। बयान में कहा गया कि गड़बड़ी के तुरंत बाद से आंतरिक प्रक्रियाओं की समीक्षा और पुनर्गठन जारी है। इंडिगो के अनुसार यह घटना 19 साल के संचालन में सबसे चुनौतीपूर्ण क्षणों में से एक है और इसका लक्ष्य यात्री भरोसा बहाल करना तथा 2030 तक भारत को वैश्विक विमानन हब बनाने में योगदान देना है।





