वाराणसी: ज्ञानवापी परिसर के अतिरिक्त सर्वे की मांग को लेकर हिंदू पक्ष की याचिका को वाराणसी जिला अदालत ने खारिज कर दिया है। यह फैसला 33 साल पुराने मामले में आया है, जिसमें हिंदू पक्ष ने Archaeological Survey of India (ASI) द्वारा सर्वे और केंद्रीय गुंबद के नीचे खुदाई की याचिका दायर की थी। अब हिंदू पक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील करने की योजना बना रहा है।
हिंदू पक्ष का दृष्टिकोण
हिंदू पक्ष के वकील विजय शंकर रस्तोगी ने बताया कि यह मामला वाराणसी में सिविल सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस संख्या 610 के तहत लंबित था। उन्होंने कहा, “इस केस में एएसआई सर्वे पहले ही हो चुका था, लेकिन 08/04/2021 को पारित आदेश का अनुपालन नहीं हुआ था। इसलिए हमने संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर का अतिरिक्त सर्वे कराने की प्रार्थना की।”
मुख्य गुंबद के नीचे शिवलिंग का दावा
केस में हिंदू पक्ष की ओर से दावा किया गया था कि केंद्रीय गुंबद के नीचे 100 फुट लंबा शिवलिंग मौजूद है, जिसे अरघा (घाट) के साथ मिलकर 50 फुट गहरा बताया गया। उनका कहना था कि इसे बड़ी सीमाओं और पट्टियों से ढक दिया गया है, जिससे यह अस्तित्वहीन हो गया है। उन्होंने इस संरचना को उजागर करने के लिए अदालत से अनुमति मांगी।
मुस्लिम पक्ष का विरोध
मुस्लिम पक्ष ने इस याचिका का विरोध किया, जिससे अदालत ने इसे खारिज कर दिया। इस मामले को पहले ही फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित किया गया था, जहां लगभग आठ महीने तक सुनवाई हुई। हिंदू पक्ष का कहना है कि एएसआई और Ground Penetrating Radar (GPR) सिस्टम वहां प्रभावी नहीं रहे और उन्होंने अपनी बात को स्थापित करने के लिए स्वतंत्र सर्वे की मांग की।
निर्णय की पृष्ठभूमि
ज्ञानवापी मामले में 1991 से चल रहे विवाद का यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है। हिंदू पक्ष का दावा है कि परिसर में धार्मिक महत्व की संरचनाएं हैं, जिनका ऐतिहासिक सर्वेक्षण आवश्यक है। इस फैसले को लेकर हिंदू पक्ष ने कहा, “इसे झटका मत बोलिए। हम उच्च न्यायालय में जाएंगे।”





