चिड़ावा में 28 जुलाई को होगा भाकपा (माले) का जिला सम्मेलन, 20 जून को किसान महासभा के धरने में लेंगे कार्यकर्ता हिस्सा

चिड़ावा, 15 जून 2025: भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) की झुंझुनूं जिला कमेटी की बैठक चिड़ावा स्थित किसान महासभा कार्यालय में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता जिला सचिव रामचंद्र कुलहरि ने की, जबकि केंद्रीय कमेटी सदस्य फूलचंद ढेवा ने मुख्य रूप से विचार रखे। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों को आम जनता के लिए विनाशकारी बताया और कहा कि पिछले ग्यारह वर्षों में गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार में वृद्धि हुई है।

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फूलचंद ढेवा ने कहा कि सरकार की निजीकरण नीति ने किसानों, मजदूरों और आदिवासियों के अधिकारों को कमजोर किया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भाकपा (माले) आमजन की समस्याओं को लेकर लगातार संघर्ष करेगी। बैठक को रामचंद्र कुलहरि, ओमप्रकाश झारोड़ा, इंद्राज सिंह चारावास, रसीद अहमद कुरैशी, रत्तीराम राव, मनफूल सिंह, प्रेम सिंह नेहरा, हरी सिंह वेदी, राम सिंह बराला और वीरभान सिंह ने भी संबोधित किया।

बैठक में संगठनात्मक निर्णय लेते हुए तय किया गया कि पार्टी का बुहाना-खेतड़ी एरिया सम्मेलन 13 जुलाई को सिंघाना में और चिड़ावा-झुंझुनूं एरिया सम्मेलन 20 जुलाई को चिड़ावा में आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा, जिला सम्मेलन 28 जुलाई को चिड़ावा में किया जाएगा।

यह भी निर्णय लिया गया कि पार्टी कार्यकर्ता 20 जून को अखिल भारतीय किसान महासभा द्वारा जिला कलेक्ट्रेट पर आयोजित धरने में भाग लेंगे। इस धरने के माध्यम से नकली बीज, खाद और डीएपी बनाने वाले कारखानों पर सख्त कार्रवाई, मंदिर माफी की जमीन पर खेती कर रहे किसानों को खातेदारी अधिकार देने, ओलावृष्टि से प्रभावित रबी फसलों के लिए मुआवजा देने, और यमुना नहर का पानी झुंझुनूं में शीघ्र लाने की मांग की जाएगी।

साथ ही, बैठक में बिजली संकट को लेकर राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा गया कि खरीफ की बुवाई के समय सिर्फ तीन घंटे बिजली देना किसानों के साथ अन्याय है।

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जिला कमेटी ने इजरायल द्वारा गाजा में की गई हिंसक कार्रवाई और ईरान पर किए गए हमले की भी निंदा की। इस पर पारित प्रस्ताव में इसे अमेरिका के सहयोग से की गई एक विस्तारवादी नीति बताया गया, जो विश्व शांति के लिए गंभीर खतरा है। भारत सरकार के रुख को भी इस मामले में असंतोषजनक बताया गया।

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