अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर ने पकड़ा खतरनाक मोड़, ट्रंप की धमकी से बढ़ा वैश्विक आर्थिक संकट का खतरा


वाशिंगटन, अमेरिका: अमेरिका और चीन के बीच जारी व्यापार युद्ध अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को चीन को सख्त चेतावनी दी है कि यदि चीन ने 24 घंटे के भीतर अमेरिका पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ वापस नहीं लिए, तो अमेरिका 9 अप्रैल से चीन पर 50 प्रतिशत का अतिरिक्त टैक्स लागू कर देगा। यह चेतावनी चीन की ओर से अमेरिका पर 34% जवाबी टैरिफ लगाए जाने के मात्र 48 घंटे बाद आई है।

टैरिफ युद्ध: 104% की कुल मार

गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने पहले ही चीन पर 34% का टैरिफ लगाया था, जिसका चीन ने तुरंत जवाब देते हुए समान टैरिफ अमेरिका पर लगा दिया। इसके बाद ट्रंप ने अब 50% अतिरिक्त टैरिफ की धमकी दी है। इससे चीन के सामान पर अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले कुल टैरिफ की दर 84% हो जाएगी।

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इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन द्वारा पहले से लागू 20% वैश्विक टैरिफ को भी जोड़ने पर यह दर 104% तक पहुंच जाती है, जो चीनी उत्पादों की अमेरिका में प्रतिस्पर्धा की संभावनाओं को लगभग समाप्त कर सकता है।

ट्रंप ने कहा: “चीन ने अमेरिका पर 34 प्रतिशत के अतिरिक्त टैक्स लगाए हैं, जो उनकी पहले से ही अवैध सब्सिडी और मुद्रा हेरफेर की नीतियों के ऊपर हैं। हमने पहले ही चेताया था कि ऐसा कदम अमेरिका के लिए अस्वीकार्य होगा।”

🇺🇸 “यह राष्ट्रवाद और आत्मनिर्भरता की लड़ाई है” – ट्रंप

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में इस पूरे टैरिफ युद्ध को केवल आर्थिक नीति न मानते हुए इसे ‘अमेरिकन राष्ट्रवाद और आत्मनिर्भरता’ की लड़ाई करार दिया। ट्रंप समर्थकों ने इसे ‘फाइनल शॉट’ बताते हुए चीन पर निर्णायक बढ़त का संकेत माना है।

व्हाइट हाउस के आंतरिक सूत्रों के अनुसार, यह फैसला ट्रंप के चुनावी रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है, जिससे वे घरेलू उद्योगों को संरक्षण देने और ‘मेड इन USA’ को प्रोत्साहित करने का वादा पूरा करना चाहते हैं।

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🇨🇳 चीन में आपात बैठकें, आधिकारिक प्रतिक्रिया लंबित

बीजिंग से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, चीनी नेतृत्व ने इस धमकी के बाद आपात बैठकें शुरू कर दी हैं। माना जा रहा है कि यदि अमेरिका 104% टैरिफ लागू करता है, तो इसका सीधा असर चीन की अमेरिका को होने वाली 500 बिलियन डॉलर से अधिक की सालाना निर्यात पर पड़ेगा।

चीन पहले से ही रियल एस्टेट सेक्टर में गंभीर ऋण संकट, कम घरेलू खपत और निर्यात में गिरावट जैसी आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में अतिरिक्त टैरिफ से लाखों नौकरियों और आर्थिक स्थिरता पर संकट मंडरा सकता है।

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