बजावा में उबाल: “5 दिन में प्लांट हटाओ”, ग्रामीणों ने प्रशासन को दी आर-पार आंदोलन की चेतावनी

मंड्रेला: क्षेत्र स्थित बजावा गांव में प्रस्तावित एफएसटीपी (फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) को लेकर चल रहा विरोध अब बेहद संवेदनशील और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले कई सप्ताह से ग्रामीण लगातार धरना, प्रदर्शन, जनसभा और जनमत संग्रह के माध्यम से प्रशासन तक अपनी आपत्ति पहुंचा रहे हैं। सोमवार को एक बार फिर बजावा पंचायत क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण रैली निकालते हुए झुंझुनूं जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और एफएसटीपी प्लांट को तत्काल निरस्त करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।

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ग्रामीण बोले- यह हमारा अंतिम लोकतांत्रिक प्रयास

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने “गांव बचाओ”, “एफएसटीपी हटाओ” और “बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करो” जैसे नारे लगाए। जिला कलेक्टर के नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि प्रस्तावित एफएसटीपी प्लांट गांव के बच्चों, पर्यावरण, भूजल स्रोतों और धार्मिक आस्थाओं के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

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स्कूल, खेल मैदान और मंदिर के पास प्लांट लगाने का विरोध

ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि प्रस्तावित एफएसटीपी प्लांट की भूमि राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय और खेल मैदान के बेहद नजदीक स्थित है। इसके अलावा आसपास आबादी क्षेत्र, मंदिर और शहीद स्मारक भी मौजूद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में प्लांट लगने से बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

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काटली नदी के बहाव क्षेत्र को लेकर भी जताई चिंता

ग्रामीणों ने प्रशासन को बताया कि प्रस्तावित स्थल से करीब 50 मीटर दूरी पर काटली नदी का बहाव क्षेत्र स्थित है। ऐसे में भविष्य में भूजल प्रदूषण और पर्यावरणीय संकट की आशंका बढ़ सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निर्णय नहीं बदला गया तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों तक पड़ेगा।

100 प्रतिशत जनमत एफएसटीपी प्लांट के विरोध में

ग्रामीणों ने ज्ञापन में 13 मई को आयोजित विशेष ग्रामसभा और जनमत संग्रह का भी उल्लेख किया। ग्रामीणों के अनुसार जनमत संग्रह में 100 प्रतिशत मतदान एफएसटीपी प्लांट के विरोध में हुआ था। ग्रामसभा में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव भी पारित किया गया कि ग्राम पंचायत भविष्य में इस प्लांट के लिए किसी प्रकार की एनओसी जारी नहीं करेगी।

वैकल्पिक सरकारी भूमि का भी दिया सुझाव

ग्रामीणों ने कहा कि मंड्रेला क्षेत्र में अन्य सरकारी भूमि उपलब्ध है, जहां एफएसटीपी प्लांट स्थापित किया जा सकता है। इसके बावजूद आबादी क्षेत्र और स्कूल के निकट प्लांट लगाने पर प्रशासन का अड़ा रहना समझ से परे है।

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महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी भागीदारी

सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे प्रदर्शनकारियों में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी संख्या देखने को मिली। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें एडीएम की ओर से सकारात्मक आश्वासन मिला है, लेकिन अब वे केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे।

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पांच दिन में फैसला नहीं तो आंदोलन होगा और बड़ा

ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पांच दिनों के भीतर एफएसटीपी प्लांट को रद्द करने का आदेश जारी नहीं किया गया तो गांव और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि इसके बाद आंदोलन ऐसा रूप ले सकता है, जैसा अब तक क्षेत्र में किसी धरने या प्रदर्शन में नहीं देखा गया।

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नरेंद्र पूनिया निभा रहे आंदोलन में अहम भूमिका

इस पूरे आंदोलन में पूर्व पंचायत समिति सदस्य नरेंद्र पूनिया लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार जब गांव और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति बनने लगी थी, तब नरेंद्र पूनिया ने जनमत संग्रह और ग्रामसभा का लोकतांत्रिक रास्ता सुझाया, जिसे पूरे गांव ने समर्थन दिया।

नरेंद्र पूनिया ने कहा कि गांव के लोग पिछले कई दिनों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन को हर स्तर पर समझाने का प्रयास किया गया, जनमत कराया गया और ग्रामसभा आयोजित की गई। उनका कहना है कि गांव की 100 प्रतिशत जनता की भावना को नजरअंदाज किया गया तो स्थिति बिगड़ सकती है। उन्होंने प्रशासन से बच्चों, पर्यावरण और गांव के भविष्य को देखते हुए एफएसटीपी प्लांट का निर्णय वापस लेने की मांग की।

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