चिड़ावा: आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2025-26 और आकलन वर्ष 2026-27 के लिए आईटीआर-1 और आईटीआर-4 की ऑनलाइन फाइलिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है। रिटर्न फाइलिंग शुरू होते ही बड़ी संख्या में करदाता आईटीआर दाखिल करने की तैयारी में जुट गए हैं, लेकिन टैक्स विशेषज्ञों ने इस बार जल्दबाजी से बचने की सलाह दी है।

AIS, TIS और फॉर्म 26AS अपडेट होने तक करें इंतजार
आईसीएआई अजमेर चैप्टर के चेयरमैन सीएस सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि कई करदाताओं के AIS (वार्षिक सूचना विवरण), TIS (करदाता सूचना सारांश) और फॉर्म 26AS में अभी पूरी जानकारी अपडेट नहीं हुई है। ऐसे में जल्दबाजी में आईटीआर दाखिल करने पर बाद में आयकर विभाग का नोटिस आने, रिफंड अटकने या संशोधित रिटर्न भरने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

उन्होंने कहा कि बैंक, कंपनियां, म्यूचुअल फंड हाउस, शेयर बाजार से जुड़ी ब्रोकिंग कंपनियां और अन्य संस्थाएं अभी भी टीडीएस तथा वित्तीय लेन-देन का डेटा पोर्टल पर अपडेट कर रही हैं।

ब्याज आय और शेयर बाजार निवेशकों को सलाह
सीएस शर्मा ने कहा कि जिन करदाताओं की ब्याज आय, डिविडेंड, शेयर बाजार से लाभ, पेशेवर आय या अन्य वित्तीय आय है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बिना मिलान किए आईटीआर दाखिल करने से बाद में डेटा मिसमैच की स्थिति बन सकती है।

उन्होंने सलाह दी कि आईटीआर दाखिल करने से पहले फॉर्म 26AS, AIS, TIS, बैंक स्टेटमेंट, फॉर्म 16/16A, ब्याज प्रमाण पत्र और कैपिटल गेन स्टेटमेंट का आपस में मिलान जरूर कर लें। सभी जानकारियां अपडेट होने के बाद ही रिटर्न दाखिल करना अधिक सुरक्षित रहेगा।

गलत जानकारी पर फंस सकता है रिफंड
विशेषज्ञों के अनुसार यदि करदाता अधूरी जानकारी के आधार पर आईटीआर भर देते हैं तो रिफंड प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। कई मामलों में आयकर विभाग संशोधित रिटर्न दाखिल करने के निर्देश भी जारी कर सकता है। इसलिए सही और अपडेटेड जानकारी के साथ रिटर्न फाइल करना जरूरी है।





