जामा मस्जिद विवाद: संभल में हिंसा के बाद तीन की मौत, 30 पुलिसकर्मी घायल, इंटरनेट सेवाएं ठप

उत्तर प्रदेश, संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में रविवार को जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान बड़ा बवाल हो गया। हिंसा के चलते तीन लोगों की मौत हुई और 30 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। भीड़ ने पथराव और फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस को बल प्रयोग और फायरिंग करनी पड़ी। घटना के बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति है और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।

सर्वे के दौरान बवाल की शुरुआत

रविवार सुबह 7 बजे कोर्ट के आदेश पर एडवोकेट कमिश्नर रमेश राघव की अगुवाई में सर्वे टीम जामा मस्जिद पहुंची। टीम में वादी पक्ष के अधिवक्ता विष्णु जैन और गोपाल शर्मा, केंद्र सरकार के वकील विष्णु शर्मा, और जामा मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष शामिल थे। डीएम और एसपी की निगरानी में वीडियोग्राफी शुरू होते ही मस्जिद के बाहर भीड़ इकट्ठा होने लगी।

जामा मस्जिद विवाद: संभल में हिंसा के बाद तीन की मौत, 30 पुलिसकर्मी घायल, इंटरनेट सेवाएं ठप

करीब 8:30 बजे भीड़ ने मस्जिद में घुसने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद हालात बेकाबू हो गए, और पथराव शुरू हो गया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया, लेकिन फायरिंग और वाहनों में आगजनी के कारण स्थिति और गंभीर हो गई।

तीन लोगों की मौत, 30 पुलिसकर्मी घायल

पुलिस और उपद्रवियों के बीच हुई झड़प में तीन लोगों की मौत हो गई, जिनकी पहचान नईम गाजी, रुमाल खां और बिलाल अंसारी के रूप में हुई है। हिंसा में बहजोई के डिप्टी कलेक्टर रमेश बाबू, सीओ अनुज चौधरी, और एसपी के पीआरओ समेत 30 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए।

महत्वपूर्ण अधिकारियों का कैंप और इंटरनेट सेवा बंद

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए संभल में पुलिस बल बढ़ा दिया गया है। डीआईजी मुनिराज और मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह मौके पर कैंप कर रहे हैं। घटना के बाद अफवाहों को रोकने के लिए इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है, और बाजार पूरी तरह से बंद हैं।

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कोर्ट का आदेश और विवाद का मूल कारण

यह मामला तब शुरू हुआ जब वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु जैन ने 19 नवंबर को शाही जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में याचिका दायर की। अदालत ने मस्जिद की वीडियोग्राफी और सर्वे कराने का आदेश दिया।

कोर्ट ने कहा कि यह मामला संवेदनशील है और दोनों पक्षों को सुना जाना जरूरी है। एडवोकेट कमिश्नर को सर्वे रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।

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