नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश में 91 वर्षों बाद जातिगत जनगणना कराने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। इस निर्णय ने जहां देशभर में सामाजिक न्याय की दिशा में नई उम्मीदें जगाई हैं, वहीं अब इसे लेकर राजनीतिक हलकों में क्रेडिट लेने की होड़ भी शुरू हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने संसद में यह वचन दिया था कि जाति जनगणना करवा कर रहेंगे, और अब यह होने जा रही है।

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राहुल गांधी का बयान: हमने योजनाबद्ध लड़ाई लड़ी है

प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से राहुल गांधी ने कहा,

“हमने केवल दबाव नहीं बनाया, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से लड़ाई लड़ी है। संसद में मैंने कहा था कि जाति जनगणना करवा कर रहेंगे और 50% आरक्षण की दीवार को तोड़ेंगे।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार को सिर्फ घोषणा नहीं करनी चाहिए, बल्कि इस पूरी प्रक्रिया की स्पष्ट टाइमलाइन जनता के सामने लानी चाहिए।

तेलंगाना मॉडल को बताया उपयुक्त

राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को तेलंगाना मॉडल को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि तेलंगाना में पारदर्शी और समावेशी जाति सर्वे कराया गया है, और केंद्र सरकार को भी ऐसे ही सर्वे की योजना बनानी चाहिए।

उन्होंने कहा,

“जाति जनगणना का डिज़ाइन बेहद अहम है। एक मॉडल बिहार का है, दूसरा तेलंगाना का। इन दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है।”

50% आरक्षण की सीमा हटाने की मांग दोहराई

कांग्रेस नेता ने कहा कि जातिगत आंकड़ों के आधार पर आरक्षण की वर्तमान 50% सीमा को खत्म करना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि

“सरकारी संस्थानों की तरह निजी क्षेत्र में भी आरक्षण लागू होना चाहिए। हम चाहते हैं कि धारा 55(5) को तुरंत लागू किया जाए।”

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि शिक्षा और निजी नौकरियों में भी समान अवसर मिलने चाहिए।

कांग्रेस का विज़न और मैनिफेस्टो

राहुल गांधी ने दोहराया कि कांग्रेस पार्टी के मैनिफेस्टो में भी यह साफ तौर पर लिखा गया है कि अनुच्छेद 15(5) के अंतर्गत निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू किया जाए।

“हम चाहते हैं कि सरकार डेवलपमेंटल विजन भी सामने रखे। यह केवल आंकड़े नहीं, बल्कि सामाजिक हिस्सेदारी का सवाल है।”

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कब और कैसे होगी जाति जनगणना?

राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से स्पष्ट रूप से यह पूछा है कि:

  • जाति जनगणना कब कराई जाएगी?
  • क्या इसकी कोई समयसीमा तय की गई है?
  • क्या सरकार बजट आवंटित कर चुकी है?

उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना की टाइमलाइन सार्वजनिक की जानी चाहिए। कांग्रेस इस प्रक्रिया को पूरा समर्थन देगी, लेकिन पारदर्शिता और समावेशिता सबसे जरूरी हैं।

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