8 दिन बाद चिड़ावा में संपन्न हुई बावलिया बाबा की दिव्य संदेश यात्रा, महाआरती व जयकारों के बीच परमहंस पीठ पर हुआ समापन

चिड़ावा: शहर में आध्यात्मिक चेतना और सनातन परंपरा का सजीव दृश्य उस समय देखने को मिला, जब परमहंस पं. गणेशनारायण बावलिया बाबा के दिव्य संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से निकाली गई बावलिया बाबा दिव्य संदेश यात्रा का विधिवत समापन हुआ। आठ दिनों तक झुंझुनूं जिले के शहरों और ग्रामीण अंचलों में भ्रमण करने के बाद यात्रा पुनः चिड़ावा के पोद्दार पार्क स्थित सनातन आश्रम के परमहंस पीठ पर पहुंची, जहां महाआरती, प्रवचन और प्रसाद वितरण के साथ श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई।

जिलेभर में गूंजा बावलिया बाबा का आध्यात्मिक संदेश

परमहंस पीठ, चिड़ावा से प्रारंभ हुई यह दिव्य संदेश यात्रा झुंझुनूं जिले के प्रमुख कस्बों और गांवों में पहुंची। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थलों पर बावलिया बाबा की आरती, मंगल पाठ, आध्यात्मिक साहित्य वितरण और प्रवचन आयोजित किए गए। आयोजकों के अनुसार यात्रा का उद्देश्य मानव जीवन को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ना और सनातन मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।

सुलताना और अरड़ावता होते हुए चिड़ावा पहुंची यात्रा

यात्रा के अंतिम चरण में यह दिव्य रथ सुलताना और अरड़ावता होते हुए चिड़ावा नगर में प्रवेश कर पोद्दार पार्क स्थित सनातन आश्रम के परमहंस पीठ पर पहुंचा। यहां श्रद्धालुओं की उपस्थिति में विधिवत महाआरती संपन्न हुई। जयकारों और भक्ति भाव के वातावरण में बाबा का प्रसाद वितरित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की।

अघोरी संत बावलिया बाबा के विचारों को बताया मानवता का पथ

यात्रा संयोजक प्रभुशरण तिवाड़ी ने इस अवसर पर कहा कि अघोरी संत बावलिया बाबा ने पीड़ित मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने संसार और ईश्वर के निराकार स्वरूप को समझाकर समाज को आध्यात्मिक दिशा प्रदान की। तिवाड़ी ने कहा कि ऐसे संतों के जीवन दर्शन से मानव मात्र को प्रेरणा लेकर अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे मौजूद

समापन अवसर पर पीसीपी स्कूल के निदेशक विक्रम जांगिड़, सियाराम शास्त्री, पंकज कुमार सिहोड़, सुरेश शेखावत, गिरधर गोपाल महमिया और सुभाष धाबाई उपस्थित रहे। कार्यक्रम में श्याम राणा, सुरेन्द्र डांगी, ग्यारसीलाल भारतीय, सत्यनारायण शर्मा, मातादीन महर्षि, विक्रम सिंह, विकास जांगिड़ और रत्तिराम राजोतिया सहित अनेक श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया।

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