नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में एक अनोखा दृश्य देखने को मिला, जब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को मंत्रियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताते हुए सार्वजनिक रूप से फटकार लगाई। यह घटना तब हुई जब शून्यकाल शुरू होने से पहले अर्जुन राम मेघवाल कार्यसूची में अंकित दस्तावेज संबंधित मंत्रियों की अनुपस्थिति में प्रस्तुत कर रहे थे।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा, “संसदीय कार्य राज्य मंत्री जी, यह प्रयास करें कि जिन मंत्रियों का नाम सदन पटल पर है, वे उपस्थित रहें। यदि वे नहीं आते, तो आप ही उनके सभी सवालों के जवाब दे दें।”

स्पीकर के इस बयान के बाद सदन में ठहाके गूंज उठे। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जहां लोग स्पीकर के इस रुख की तारीफ कर रहे हैं।

दस्तावेज प्रस्तुत करने का नियम क्या कहता है?

प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद सदन की कार्यसूची में अंकित दस्तावेज संबंधित मंत्रियों द्वारा सदन के पटल पर रखा जाता है। यदि मंत्री अनुपस्थित होते हैं, तो यह कार्य संसदीय कार्य राज्य मंत्री को करना पड़ता है। हालांकि, लगातार अनुपस्थिति पर स्पीकर ने अपनी असहमति व्यक्त की।

संविधान पर चर्चा के लिए सहमति

सोमवार को सरकार और विपक्षी दलों के बीच गतिरोध समाप्त हो गया, और संविधान पर चर्चा के लिए सहमति बन गई।

  • लोकसभा में चर्चा की तारीखें: 13 और 14 दिसंबर
  • राज्यसभा में चर्चा की तारीखें: 16 और 17 दिसंबर

शनिवार और रविवार को भी होगी सदन की कार्यवाही

प्रश्नकाल समाप्त होने के तुरंत बाद स्पीकर ओम बिरला ने घोषणा की कि 14 दिसंबर को सदन की बैठक सुबह 11 बजे होगी। उन्होंने कहा, “यदि आप कार्यवाही स्थगित करते हैं, तो आपको शनिवार और रविवार को भी कार्यवाही में भाग लेना होगा।”

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