मुकुंदगढ़: बीमारी से परेशान बुजुर्ग दंपती ने की आत्महत्या, तीन दिन बाद बदबू आने पर खुला मामला, बेटों पर उठे सवाल

मुकुंदगढ़, 15 मई 2025: झुंझुनूं जिले के मुकुंदगढ़ कस्बे के वार्ड 16 में गुरुवार दोपहर एक बुजुर्ग दंपती ने आत्महत्या कर ली। पुलिस को उनके कमरे से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें बीमारी से परेशान होकर जीवन समाप्त करने की बात कही गई है। दंपती के शव घर के अंदर बिस्तर पर पड़े मिले। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दरवाजा तोड़ा और शवों को बरामद किया।

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थाना क्षेत्र के एएसआई रतनलाल मीणा ने बताया कि मृतक श्यामसुंदर दर्जी (80) लेखक थे और पत्नी चंद्रकला (75) के साथ अपने निजी मकान में रहते थे। वे पिछले कुछ दिनों से पड़ोसियों को दिखाई नहीं दिए थे। गुरुवार दोपहर दो बजकर तीस मिनट पर उनके घर से दुर्गंध आने पर स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। जब पुलिस ने मकान का मुख्य दरवाजा तोड़ा, तो दोनों के शव अंदर कमरे में बिस्तर पर पड़े मिले।

पुलिस को कमरे से एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें लिखा था कि बीमारी से त्रस्त होकर दोनों पति-पत्नी जीवन समाप्त कर रहे हैं और उनके बच्चों को परेशान न किया जाए। पुलिस ने घटनास्थल पर एफएसएल और एमओबी टीम को बुलाकर साक्ष्य एकत्र किए। दोनों शवों को मुकुंदगढ़ के राजकीय अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है। प्रथम दृष्टया मामला सामूहिक आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन अंतिम पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से होगी।

पड़ोसी महेश पाराशर के अनुसार, श्यामसुंदर और चंद्रकला दोनों लंबे समय से बीमार चल रहे थे और घर में अकेले रहते थे। महेश ने यह भी बताया कि पारिवारिक अनबन के कारण वे अकेलेपन और उपेक्षा का शिकार हो गए थे। ऐसा प्रतीत होता है कि उनकी मृत्यु तीन दिन पहले सोमवार को ही हो गई थी, लेकिन किसी को भनक नहीं लगी।

दंपती के तीन बेटे हैं — सुशील जो बेंगलुरु में कार्यरत है, और विकास व राकेश जो जयपुर में नौकरी करते हैं। किसी भी बेटे ने उन्हें अपने पास नहीं रखा था। घटना की सूचना मिलने पर तीनों बेटे शाम पांच बजे मुकुंदगढ़ पहुंचे। इस दौरान पड़ोसियों के साथ कहासुनी भी हुई। बताया गया कि जब बेटे घर पहुंचे तो एक युवक ने ताना मारते हुए कहा कि अब गाड़ियों में बैठकर आए हो, जब माता-पिता जीवित थे तब उनकी सुध नहीं ली। जवाब में एक बेटा भड़क गया और विवाद की स्थिति बन गई।

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स्थानीय लोगों ने कहा कि बुजुर्ग दंपती अक्सर बीमार रहते थे और देखभाल की कमी के चलते मानसिक और शारीरिक रूप से टूट चुके थे। इस दुखद घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है और एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि क्या बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी केवल समाज की सहानुभूति पर छोड़ दी जानी चाहिए?

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शवों का पोस्टमॉर्टम शुक्रवार सुबह किया जाएगा, जिसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

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