ब्रिटेन में जनसांख्यिकीय बदलाव की चौंकाने वाली रिपोर्ट: 2063 तक अल्पसंख्यक होंगे श्वेत मूल के ब्रिटिश, मुस्लिम आबादी में जबरदस्त उछाल संभावित

ब्रिटेन: ब्रिटेन में जनसंख्या से जुड़ी एक हालिया चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसके अनुसार आने वाले दशकों में देश की जनसंख्या संरचना में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिलेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि वर्तमान जनसांख्यिकीय रुझान जारी रहे, तो वर्ष 2063 तक श्वेत मूल के ब्रिटिश नागरिक अपने ही देश में अल्पसंख्यक हो जाएंगे। वहीं मुस्लिम समुदाय की आबादी में तीव्र गति से वृद्धि होगी और यह आबादी देश की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को एक नई दिशा में ले जाएगी।

ब्रिटेन में जनसंख्या असंतुलन की आशंका

इस अध्ययन में बताया गया है कि वर्तमान में ब्रिटेन की कुल आबादी में 73% लोग श्वेत ब्रिटिश मूल के हैं, लेकिन यह आंकड़ा 2050 तक घटकर 57% और 2075 तक 44% पर पहुंच सकता है। 2100 तक यह आंकड़ा केवल 33.7% रहने का अनुमान है। यानी श्वेत ब्रिटिश मूल की जनसंख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जबकि विदेश में जन्मे लोग और उनके वंशज तेजी से बहुसंख्यक बनने की ओर अग्रसर हैं।

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हर पांचवां नागरिक होगा मुसलमान

रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन में इस समय मुस्लिम आबादी करीब 7% है, जो कि अगले 25 वर्षों में बढ़कर 12% तक पहुंच जाएगी। इस सदी के अंत तक यह आंकड़ा 19-20% को पार कर सकता है, यानी आने वाले दशकों में हर पांचवां ब्रिटिश नागरिक मुस्लिम होगा। इस्लाम, ईसाई धर्म के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा धर्म बन चुका है।

जनगणना आंकड़े: मुस्लिम जनसंख्या में तेजी

ब्रिटेन की 2021 की जनगणना (Office for National Statistics) के अनुसार देश में मुस्लिम आबादी 40 लाख से अधिक हो चुकी है, जबकि 2001 में यह संख्या महज 16 लाख थी। अकेले लंदन में मुस्लिम आबादी 15% से ज्यादा है। लंदन और बकिंघम जैसे बड़े शहरों में श्वेत ब्रिटिश पहले ही अल्पसंख्यक हो चुके हैं।

नस्लीय विविधता में भारी इजाफा

बकिंघम यूनिवर्सिटी के एक शोध के अनुसार, इस सदी के अंत तक एक-तिहाई से भी कम बच्चे ऐसे होंगे, जिनके दोनों माता-पिता श्वेत ब्रिटिश होंगे। हर 10 में से 6 बच्चों के माता या पिता में से एक विदेश में जन्मा होगा। इससे न केवल सामाजिक ताना-बाना बदलेगा, बल्कि शैक्षिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाएं भी प्रभावित होंगी।

बदलती राजनीति और नीति निर्धारण

केंट यूनिवर्सिटी के मानद प्रोफेसर मैट गुडविन का कहना है कि यह रिपोर्ट ब्रिटेन की आंखें खोलने वाली है। उनका मानना है कि यदि यही प्रवृत्ति जारी रही, तो देश की मूल पहचान, संस्कृति और परंपराएं अप्रवासी समुदायों के हाथों में चली जाएंगी। इसका असर देश की राजनीति, विदेश नीति और आंतरिक नीतियों पर भी देखने को मिलेगा।

अप्रवासी प्रवाह बना मुख्य कारण

ब्रिटेन में अप्रवासियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। लेबर पार्टी की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में रिकॉर्ड 9 लाख 6 हजार अप्रवासी ब्रिटेन पहुंचे, जिनमें वैध और अवैध दोनों शामिल हैं। यह आंकड़ा देश के लिए एक चेतावनी है। ब्रिटिश सरकार अब अप्रवासियों के लिए काम, पढ़ाई और निवास के नियम कड़े करने की तैयारी में है।

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जन्म दर में अंतर

ब्रिटिश मूल के परिवारों में औसत जन्म दर 1.39 है, जबकि विदेशी अप्रवासियों में यह 1.97 और मुस्लिम समुदाय में 2.35 है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि मुस्लिम आबादी में वृद्धि जन्म दर के माध्यम से भी तेजी से हो रही है। जबकि गैर मुस्लिम विदेशी अप्रवासियों में जन्म दर 1.54 है।

2079 तक बहुसंख्यक बनेंगे अप्रवासी समुदाय

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2079 तक विदेश में जन्मे लोग और उनके वंशज बहुसंख्यक हो जाएंगे। वहीं 2063 तक श्वेत मूल के लोग अल्पसंख्यक हो जाएंगे। वर्ष 2100 तक अश्वेत और अन्य अप्रवासी समुदायों की संयुक्त जनसंख्या 59.3% तक पहुंच सकती है।

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