चिड़ावा: शहर के निवासी अखिल लामोरिया ने 21 लाख रुपये का शगुन लौटाकर दहेज प्रथा के खिलाफ मिसाल पेश की है। साहवा निवासी ज्योति संग विवाह में केवल एक रुपये और नारियल स्वीकार किया गया। सांसद विजेंद्र ओला सहित कई जनप्रतिनिधियों ने इस सामाजिक पहल की सराहना की।
दहेज प्रथा के खिलाफ साहसिक पहल, 21, फरवरी को हुई शादी बनी मिसाल
राजस्थान के चिड़ावा क्षेत्र में एक शादी सामाजिक बदलाव की मिसाल बन गई, जब अखिल लामोरिया ने अपनी शादी में मिले 21 लाख रुपये नकद शगुन के लौटा दिए। 21 फरवरी को साहवा जिला चूरू निवासी ज्योति के साथ संपन्न हुए इस विवाह समारोह में दहेज प्रथा के खिलाफ एक सशक्त संदेश दिया गया।
अखिल के पिता विनोद लामोरिया, जो सिंघाना थाने में सहायक उप निरीक्षक पद पर कार्यरत हैं और अरड़ावता फाटक के पास गोकुल कॉलोनी वार्ड नंबर 20, चिड़ावा के निवासी हैं, ने इस निर्णय का समर्थन किया। समारोह के दौरान अखिल के ताऊ अशोक लामोरिया ने सार्वजनिक रूप से 21 लाख रुपये की राशि वापस करते हुए इसे कुप्रथा बताया। उन्होंने कहा कि समाज को दहेज मुक्त विवाह की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
शगुन में केवल एक रुपया और नारियल, समाज को दिया सकारात्मक संदेश, परंपरा नहीं, बदलाव का संकल्प

विवाह समारोह में वधू पक्ष की ओर से ज्योति के पिता जयप्रकाश सिहाग ने शगुन स्वरूप 21 लाख रुपये भेंट किए थे, जिन्हें सम्मानपूर्वक लौटा दिया गया। प्रतीकात्मक रूप से केवल एक रुपये का सिक्का और नारियल स्वीकार किया गया। इस कदम ने विवाह को सादगीपूर्ण और सामाजिक चेतना से जुड़ा आयोजन बना दिया।
लामोरिया परिवार का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब दहेज प्रथा, बाल विवाह और सामाजिक कुरीतियों को लेकर प्रदेश में लगातार बहस जारी है। चिड़ावा की यह शादी अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई है।
बेटी डॉक्टर अन्नू की शादी से मिली प्रेरणा, परिवार में पहले भी हुआ एक रुपए व नारियल के शगुन पर विवाह
लामोरिया परिवार में यह सामाजिक सोच नई नहीं है। 19 फरवरी को परिवार की बेटी डॉक्टर अन्नू का विवाह खेतड़ी तहसील के ढोसी निवासी इंजीनियर सौरभ, जो अशोक चौधरी के पुत्र हैं, के साथ संपन्न हुआ था। सौरभ के पिता अशोक चौधरी जालौर के भीनमाल में रेलवे अधीक्षक पद पर कार्यरत हैं। उस विवाह में डॉ अन्नू के ससुर अशोक चौधरी ने लामोरिया परिवार से भी केवल एक रुपये और नारियल का शगुन लिया था।
परिवार ने बताया कि उसी प्रेरणा से अखिल की शादी में भी दहेज नहीं लेने का निर्णय लिया गया, जिससे समाज में सकारात्मक संदेश जाए।
जनप्रतिनिधियों और समाज के प्रबुद्ध वर्ग ने की सराहना
इस सामाजिक पहल की सराहना सांसद विजेंद्र ओला, भाजपा नेता राजेश दहिया, सुरेश भूकर, विरेंद्र लामोरिया, राजेश लामोरिया, सुरेश लामोरिया, यूवा प्रवक्ता विकास पायल, शार्दुल पूनिया, सुनील जांगिड़ तथा सीआई आशाराम गुर्जर सहित अनेक गणमान्य लोगों ने की। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे कदम समाज में दहेज प्रथा उन्मूलन की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समाज के प्रभावशाली परिवार इस प्रकार की पहल करें तो दहेज मुक्त भारत का सपना साकार हो सकता है।
दहेज मुक्त विवाह की ओर बढ़ता राजस्थान
राजस्थान में हाल के वर्षों में दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूकता अभियान तेज हुए हैं। अखिल लामोरिया और ज्योति का विवाह अब दहेज मुक्त शादी, सामाजिक सुधार और सकारात्मक पहल का प्रतीक बन चुका है। यह विवाह न केवल दो परिवारों का मिलन है, बल्कि समाज को नई दिशा देने वाला उदाहरण भी बन गया है।





