बिजली कर्मचारी ने कहा 12-6 महीने तक नहीं आएगी बिजली, दफ्तर में भेज दो रिकॉर्डिंग, आक्रोशित ग्रामीणों ने मंड्रेला जीएसएस पर किया प्रदर्शन, चक्का जाम की दी चेतावनी

मंड्रेला: झुंझुनूं जिले के मंड्रेला क्षेत्र के नालवा गांव में लगातार छह महीने से बिजली आपूर्ति ठप रहने से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा शनिवार को फूट पड़ा। भारी संख्या में ग्रामीणों ने मंड्रेला स्थित जीएसएस पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और बिजली विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों ने बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होने पर मंड्रेला-राजगढ़ मार्ग जाम करने की चेतावनी दी।

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने बताया कि गांव को पहले मंड्रेला जीएसएस से जोड़ा गया था, लेकिन कुछ समय पूर्व उसे लाम्बा जीएसएस से जोड़ दिया गया। तब से गांव में बिजली आपूर्ति लगभग बंद जैसी स्थिति में है। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभागीय कर्मचारियों से बार-बार संपर्क करने पर भी समाधान नहीं हो रहा है। लोगों ने कहा कि कॉल करने पर कर्मचारी अभद्रता करते हैं और कहते हैं कि “अब 12 – 6 महीने तक बिजली नहीं आएगी, रिकॉर्डिंग चाहो तो दफ्तर में भेज दो”। इस रवैये से ग्रामीणों में भारी रोष है।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने लाइनमैन को तत्काल प्रभाव से हटाने और लाम्बा जीएसएस के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि गांव की बिजली व्यवस्था दोबारा मंड्रेला जीएसएस से नहीं जोड़ी गई, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे।

घटना की सूचना मिलने पर बिजली विभाग के कनिष्ठ अभियंता मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत कर समाधान का आश्वासन दिया। विभाग ने सोमवार तक समस्या के निराकरण का समय मांगा, जिसके बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन को फिलहाल स्थगित कर दिया। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने दो टूक कहा है कि यदि निर्धारित समय में बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो वे सड़क पर उतरकर चक्काजाम करेंगे और यह आंदोलन और तेज होगा।

ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के मौसम में बिजली की अनुपलब्धता से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की तबीयत और दैनिक दिनचर्या पर बुरा असर पड़ रहा है। खेती-किसानी के काम भी पूरी तरह ठप हो चुके हैं। ग्रामीणों ने दोहराया कि अब वे सिर्फ आश्वासन नहीं बल्कि ठोस समाधान चाहते हैं।

इस प्रदर्शन के बाद बिजली विभाग पर दबाव बढ़ गया है और अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं या ग्रामीणों को एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

(समाचार झुंझुनूं 24 इस वॉइस रिकॉर्डिंग की पुष्टि नहीं करता)

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