पाकिस्तान में एससीओ शिखर सम्मेलन: शहबाज शरीफ ने एस जयशंकर का इस्लामाबाद में किया स्वागत

इस्लामाबाद, पाकिस्तान: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की शासनाध्यक्ष परिषद (CHG) की 23वीं बैठक के लिए आए भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर का स्वागत किया। जयशंकर इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जहां व्यापार, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। पाकिस्तान में यह शिखर सम्मेलन कड़ी सुरक्षा के बीच आयोजित किया जा रहा है।

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प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का गर्मजोशी भरा स्वागत

डॉ. एस जयशंकर मंगलवार को इस्लामाबाद पहुंचे और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मिले। शहबाज शरीफ ने जयशंकर का स्वागत करते हुए उन्हें एससीओ सम्मेलन में भाग लेने के लिए धन्यवाद दिया। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया और संक्षिप्त बातचीत भी की। इससे पहले प्रधानमंत्री शरीफ ने अपने आवास पर आयोजित रात्रिभोज में भी जयशंकर को आमंत्रित किया, जहां उन्होंने अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ बातचीत की।

एससीओ की 23वीं बैठक: व्यापार और अर्थव्यवस्था मुख्य एजेंडा

एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद की 23वीं बैठक आज इस्लामाबाद में आयोजित की जा रही है। इस बैठक में व्यापार और आर्थिक मुद्दों पर गहन चर्चा की जाएगी। विदेश मंत्री एस जयशंकर व्यापार और अर्थव्यवस्था पर होने वाली महत्वपूर्ण वार्ताओं में भाग लेंगे। शिखर सम्मेलन के दौरान एससीओ सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। यह बैठक संगठन के व्यापारिक और आर्थिक एजेंडा पर केंद्रित होती है, जिसमें सदस्य देश आर्थिक विकास को मजबूत करने के लिए रणनीतियों पर विचार करेंगे।

एससीओ की यह बैठक सालाना आयोजित की जाती है, और इसमें विभिन्न देशों के शासनाध्यक्ष हिस्सा लेते हैं। इस बार की बैठक पाकिस्तान की अध्यक्षता में हो रही है, जो संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।

भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले कई वर्षों से संबंधों में तनाव रहा है, खासकर कश्मीर मुद्दे और आतंकवाद के मसले पर। पिछले 9 वर्षों में यह पहली बार है कि भारत के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान की यात्रा की है। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि इन संबंधों को सुधारने के लिए कई चुनौतियां अब भी बरकरार हैं।

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