पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ईमारत

इस्लामाबाद: पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने निकाह और तलाक के मामलों में महिलाओं के हक़ में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जस्टिस अमीनुद्दीन खान और जस्टिस अतहर मिनुल्लाह की दो सदस्यीय पीठ ने एक महिला के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसने तलाक के बाद निकाहनामे में निर्धारित शर्तों के तहत दहेज और अन्य वस्तुओं की वापसी के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

यह फैसला जस्टिस अतहर मिनुल्लाह द्वारा लिखा गया था, जिसमें उन्होंने कहा कि निकाहनामा एक इस्लामी विवाह अनुबंध है, जिस पर दोनों पक्षों के हस्ताक्षर होते हैं।

महिला को जमीन का टुकड़ा

इस मामले में, महिला ने तलाक के बाद निकाहनामे में दर्ज जमीन के एक टुकड़े पर अपना हक़ जताया था। उच्च न्यायालय ने पहले ही महिला को जमीन का टुकड़ा दे दिया था, लेकिन दूसरे पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दावा किया कि यह जमीन केवल एक घर बनाने के लिए थी और महिला तलाक के बाद वहां नहीं रह सकती।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने न केवल उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा, बल्कि यह भी कहा कि पुरुष-प्रधान समाज में, शर्तें अक्सर पुरुषों द्वारा तय की जाती हैं। यदि दुल्हन से परामर्श किए बिना निकाहनामे में शर्तें भर दी जाती हैं, तो इसका इस्तेमाल उसके हितों के खिलाफ नहीं किया जा सकता।

महिलाओं के लिए बड़ी राहत

यह फैसला पाकिस्तान में महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत है। यह दर्शाता है कि न्यायालय महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उन्हें तलाक के बाद भी उचित हक़ दिलाने के लिए तैयार है।

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