झुंझुनूं: जिले के लाल चौक पर नहर को लेकर चल रहे आन्दोलन के 275वें दिन आयोजित जनसभा आज खास प्रभाव नहीं छोड़ पाई। अखिल भारतीय किसान सभा द्वारा आहूत इस जनसभा में कोई भी बड़ा नेता नहीं पहुंचा, जिसकी खीज बाद में सभा के आयोजकों के व्यक्तव्य में भी देखने को मिली।

नहर सत्याग्रह आन्दोलन की इस बहुप्रचारित जनसभा में आयोजकों द्वारा झुंझुनू सांसद बिजेंद्र सिंह ओला, चूरू सांसद राहुल कस्वां, सीकर सांसद कामरेड अमराराम तथा नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के शामिल होने के दावे किए गए थे, लेकिन इनमें से कोई भी नेता सभा में नहीं पहुंचा। जनसभा में क्षेत्र के सभी किसानों को शामिल होने का आह्वान किया गया था। किसान नेता गिरधारी सिंह महला, मदनसिंह यादव, बजरंग नेहरा और विजेंद्र शास्त्री समेत कई अन्य किसान नेता पिछले काफी दिनों से सभा की तैयारियों में जुटे हुए थे। जनसभा को सफल बनाने के लिए जिले भर में जन जागृति यात्राएं भी निकाली गई थी। लेकिन आज सभा में जनता की भी अपेक्षित उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाई।

जनसभा के विफल होने पर आयोजन समिति के सदस्यों का भी गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने स्पष्ट रूप से सांसद अमराराम के अलावा शेखावाटी के सभी बड़े नेताओं को समय आने पर इसका मजा चखाने की बात कही है (सुनें बाइट)।

अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला महामंत्री मदन सिंह यादव ने कहा कि 1994 से शेखावाटी के किसान नहर की बाट जोह रहे हैं। नेताओं और पार्टियों ने इस मुद्दे पर सिर्फ राजनीति की है। राजस्थान और हरियाणा की मौजूदा सरकारों ने भी जो एमओयू किया है, वह शेखावाटी क्षेत्र के किसानों के साथ एक छलावा है क्योंकि हरियाणा सरकार यह कह चुकी है कि हरियाणा सिर्फ अधिशेष पानी ही राजस्थान को देगा।

जनसभा में वक्ताओं ने शेखावाटी क्षेत्र नहर की जरूरत पर अपने विचार व्यक्त किए तथा इसपर हो रही राजनीति को लेकर केंद्र सरकार व राज्य सरकार पर कटाक्ष किये। आयोजकों व उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने कहा कि जबतक उनकी मांगे नहीं मानी जाएगी तब तक यह धरना व विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

जनसभा में ये प्रमुख नेता हुए शामिल

नहर के मुद्दे पर आज लालचौक पर हुई सभा में किसान महा पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट, यमुना जल संघर्ष समिति के संयोजक यशवर्द्धन सिंह शेखावत, भारत ग्राम स्वराज के राष्ट्रीय अध्यक्ष लीलाराम यादव, किसान सभा के प्रांतीय महासचिव छगनलाल, एडवोकेट धर्मपाल श्योराण, पूर्व प्रधान बजरंग नेहरा, पूर्व प्रधान शेरसिंह नेहरा, काटली नदी संरक्षण समिति अध्यक्ष कैलाश मीणा, निर्मल वर्मा चूरू, इंद्राज सिंह ओजटू, सागर सिंह खाचरियावास सीकर, पूर्व प्रधान माणक चंद सुणीया सहित अन्य किसान व नहर आन्दोलन से जुड़े नेता मौजूद रहे।

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