घाना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को अपने बहु-देशीय राजकीय दौरे के पहले चरण में घाना की राजधानी अक्रा पहुंचे। यह यात्रा तीन दशकों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला दौरा है, जिसे दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अक्रा एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी का पारंपरिक और गरिमापूर्ण स्वागत किया गया। घाना के राष्ट्रपति जॉन द्रामानी महामा स्वयं एयरपोर्ट पर पहुंचकर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का अभिवादन किया, जो कि भारत-घाना संबंधों की गर्मजोशी और ऐतिहासिक साझेदारी का प्रतीक रहा।

अक्रा पहुंचने पर भारतीय समुदाय के लोगों ने मोदी का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। होटल के बाहर बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग हाथों में तिरंगा लिए ‘जय मोदी’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों के साथ उनका इंतजार करते रहे। जैसे ही प्रधानमंत्री होटल पहुंचे, वहां मौजूद लोगों ने तालियों से उनका स्वागत किया। बच्चों के एक दल ने ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ का गायन किया, जिसे प्रधानमंत्री ने मुस्कान के साथ सराहा और तालियां बजाकर उत्साहवर्धन किया।

घाना के नागरिकों ने भी मोदी के स्वागत में पारंपरिक गीत ‘जय हो’ गाया और भारतीय ध्वज लहराते हुए भारत के प्रति अपनत्व दिखाया। प्रधानमंत्री ने इस स्नेह को देखकर खुशी प्रकट की और हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया।

अक्रा प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति जॉन महामा के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस वार्ता में दोनों देशों के बीच निवेश, ऊर्जा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, क्षमता निर्माण और विकास साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर चर्चा होगी।

मोदी अक्रा में आयोजित भारतीय समुदाय के कार्यक्रम को भी संबोधित करेंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री घाना की संसद को भी संबोधित करेंगे, जो किसी भारतीय प्रधानमंत्री के लिए एक विशेष अवसर होगा।

अपने प्रस्थान से पहले दिए गए बयान में मोदी ने कहा कि घाना न केवल अफ्रीका महाद्वीप, बल्कि ग्लोबल साउथ में भी भारत का एक महत्वपूर्ण भागीदार है। उन्होंने इस दौरे को द्विपक्षीय सहयोग को विस्तार देने और नई संभावनाओं की तलाश की दिशा में एक ऐतिहासिक अवसर बताया।

प्रधानमंत्री ने अक्रा में एक संक्षिप्त सांस्कृतिक संध्या में भाग लिया, जिसे भारतीय समुदाय द्वारा उनके सम्मान में आयोजित किया गया था। इस संगीत कार्यक्रम ने भारत और घाना की सांस्कृतिक साझेदारी को भी एक नई पहचान दी।

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