चिड़ावा, 10 जनवरी 2025: डॉ. शंभू पवार, एक विश्व रिकॉर्ड धारक, अंतरराष्ट्रीय लेखक और पत्रकार, ने हाल ही में यूनाइटेड किंगडम के एक चैनल पर प्रसारित हुए कार्यक्रम “दिव्यलय एक व्यक्तित्व परिचय” में हिंदी पत्रकारिता की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
डॉ. पवार के अनुसार, पत्रकारिता जो कभी एक राष्ट्रीय मिशन हुआ करती थी, आज एक व्यावसायिक उद्योग बन गई है। पूंजीवाद और राजनीति के दबाव में पत्रकारिता के मूल्य गौण हो गए हैं। खोजी पत्रकारिता लगभग लुप्त हो गई है और मीडिया संस्थान अधिकतर टीआरपी बढ़ाने में लगे हुए हैं।
डॉ. पवार का मानना है कि हिंदी पत्रकारिता इस समय एक संक्रमण काल से गुजर रही है। उन्हें लगता है कि मीडिया कर्मियों को अपने कार्य के प्रति अधिक प्रतिबद्ध होना चाहिए और समाज और राष्ट्र के हित में सकारात्मक पत्रकारिता करनी चाहिए।






