झुंझुनूं, 27 अप्रैल 2025: झुंझुनूं वन विभाग में कार्यरत वनरक्षक सुलोचना की ड्यूटी में लगातार अनियमितता और उनके भाई रणजीत द्वारा अधिकारियों को धमकाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। रविवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में रेंजर विजय फगेडिया ने इस गंभीर प्रकरण का खुलासा करते हुए साफ शब्दों में कहा कि विभाग इस तरह की लापरवाही और दबाव बनाने की कोशिशों को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा।

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सुलोचना की उपस्थिति बेहद निराशाजनक

रेंजर विजय फगेडिया ने बताया कि सुलोचना वर्ष 2018 से झुंझुनूं वन विभाग में वनरक्षक के पद पर कार्यरत हैं। लेकिन उनके कार्यकाल के दौरान उनकी ड्यूटी उपस्थिति बेहद निराशाजनक रही है। फगेडिया ने आंकड़ों के हवाले से बताया कि सुलोचना औसतन तीन दिन में केवल एक बार ही ड्यूटी पर आती हैं और समय पर उपस्थित होने का रिकॉर्ड भी संतोषजनक नहीं है।

उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा कई बार सुलोचना को नोटिस जारी किए गए, मगर उनकी कार्यशैली में कोई सुधार नहीं आया। गत माह एसीएफ (असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स) के आकस्मिक निरीक्षण में भी सुलोचना अनुपस्थित पाई गईं, जिसके बाद उनके खिलाफ फिर से नोटिस जारी किया गया था।

मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान बड़ी लापरवाही

रेंजर फगेडिया ने बताया कि हाल ही में मुख्यमंत्री के झुंझुनूं दौरे के दौरान सुलोचना को एक महत्वपूर्ण ड्यूटी सौंपी गई थी, लेकिन वह बिना किसी सूचना के ड्यूटी स्थल से गायब हो गईं। उसी दिन उनके कार्यक्षेत्र (बीट) में बीहड़ क्षेत्र में आग लगने की गंभीर घटना हुई, जहां उनकी उपस्थिति अति आवश्यक थी। इस घटना ने विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को असहज स्थिति में डाल दिया।

भाई रणजीत ने शुरू की अधिकारियों को धमकाने की कोशिश

प्रेस वार्ता में रेंजर ने यह भी खुलासा किया कि जब विभाग ने सुलोचना की अनुपस्थिति पर कार्रवाई शुरू की, तो उनके भाई रणजीत ने वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। रणजीत ने कथित तौर पर स्टाफ से धमकी भरे शब्दों में कहा, “हमारा ध्यान नहीं रखते,” और विभागीय कार्यवाही रोकने के लिए दबाव डाला।

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रेंजर फगेडिया ने स्पष्ट किया कि विभाग इस प्रकार की धमकियों और दबाव को कड़ाई से नकारेगा और आवश्यकतानुसार कड़ी कार्रवाई करेगा।

अनुशासनात्मक कार्रवाई और पुलिस शिकायत की तैयारी

फिलहाल, मामले की पूरी जानकारी झुंझुनूं के डीएफओ (डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर) को दी जा चुकी है। डीएफओ ने सुलोचना को अनुशासनात्मक कार्यवाही के तहत नोटिस जारी कर दिया है और उच्चाधिकारियों को भी इस संबंध में पत्र लिखा गया है।

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