चिड़ावा: शिक्षक दिवस के अवसर पर भगवान परशुराम भवन में वाचनालय का उद्घाटन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विप्र समाज के बच्चों को मिलेगा लाभ

चिड़ावा, 5 सितंबर 2024: विप्र समाज की अग्रणी संस्था ब्रह्म चैतन्य संस्थान के सौजन्य से भगवान परशुराम भवन में वातानुकूलित वाचनालय हॉल का निर्माण करवाया गया है। शिक्षक दिवस के अवसर पर आज वाचनालय का उद्घाटन समारोह पूर्वक विप्र समाज के प्रबुद्धजनों की उपस्थिति में किया गया।

भगवान परशुराम भवन में शाम 5 बजे आयोजित उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता प्रवासी उद्योगपति हुक्मीचंद लंबीवाला ने की। कार्यक्रम में संस्थान के अध्यक्ष रामगोपाल मिश्र, कैलाश चतुर्वेदी (पूर्व उप निदेशक संस्कृत शिक्षा), संदीप शर्मा (कजारिया टाइल्स), कैलाश चन्द्र शर्मा (सीबीईओ- चिड़ावा) मंचासीन थे। वक्ताओं ने संस्था द्वारा विप्र समाज के हित में किये जा रहे कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना की।

अतिथियों ने फीता काट कर वाचनालय का उद्घाटन किया, जिसके बाद भगवान परशुराम के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर समारोह का शुभारम्भ किया गया। संस्थान के सचिव सुरेश शर्मा व प्रमोद शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। स्वागत भाषण सचिव सुरेश शर्मा ने दिया तथा संचालन संतोष अरड़ावतिया ने किया।

एसीबीईओ सुशील कुमार शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि वाचनालय पूर्णतः वातानुकूलित है और सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरा भी लगाए गए हैं। एसीबीईओ सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विप्र समाज के विद्यार्थियों के लिए बहुत कम शुल्क पर यहां शांत वातावरण में बैठने और अध्ययन की समुचित व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा होने पर वाचनालय को दो शिफ्ट में संचालित किया जाएगा। वाचनालय में फिलहाल जहां फिलहाल 22 विद्यार्थियों के लिए सीटिंग अरेंजमेंट रहेगा जबकि 25 विद्यार्थियों ने अपना रजिस्ट्रेशन करवाया है। समय-समय पर कैरियर गाइडेंस और काउंसलिंग के लिए विषय विशेषज्ञों को भी बुलाया जाएगा।

उद्घाटन समारोह में ये रहे उपस्थित

वाचनालय के उद्घाटन समारोह में डॉ. अवतार कृष्ण शर्मा, शुभराम शर्मा, प्रमोद शर्मा, प्रमोद अरड़ावतिया, धर्मेन्द्र तिवाड़ी, सुरेश शर्मा, रवि शर्मा, सुशील शर्मा, राजेश शर्मा, निरंजन शर्मा, पवन शर्मा(नवहाल), सुलोचना शर्मा, प्रदीप पुजारी, अनिल अनमोल सहित संस्थान के सभी पदाधिकारी, संरक्षक सदस्य, आजीवन सदस्य और बड़ी संख्या में विप्र समाज के प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

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