चिड़ावा: राशन डीलर्स ने मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा, शोषण रोकने की मांग

चिड़ावा, 24 फरवरी 2025: राशन डीलर्स ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एसडीएम चिड़ावा को मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में राशन डीलर्स ने अपने उत्पीड़न और मानसिक अवसाद के बारे में विस्तार से बताया है और अपनी समस्याओं के समाधान की अपील की है।

ज्ञापन में राशन डीलर्स ने बताया कि पिछले कई महीनों से उन्हें वितरण का कमीशन नहीं दिया गया है और जो दिया जाता है, वह आधा अधूरा होता है। इसके अलावा, जब कमीशन के बारे में पूछा जाता है तो अधिकारियों से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। डीलर्स ने यह भी बताया कि उन्हें बार-बार निवेदन करने के बावजूद गेहूं को दुकानों पर तुलवाने की व्यवस्था नहीं की गई है और केवल कागजी खानापूर्ति की जाती है।

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राशन डीलर्स ने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2016 के बाद से वितरण में होने वाली छीजत, जो पहले एक प्रतिशत प्रति क्विंटल डीलर को दी जाती थी, उसे रोक लिया गया है। डीलर्स का कहना है कि पिछले 8-10 वर्षों से वे अपनी खून-पसीने की कमाई से इस छीजत को पूरा कर रहे हैं, लेकिन अधिकारियों की ओर से इस समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। उन्हें “करेंगे करवाएंगे” कहकर धोखा दिया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त, राशन डीलर्स ने पोस मशीन के नाम पर लाखों रुपये की कटौती का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि ये कटौतियां अब भी की जा रही हैं, और अब तक उन्हें कांटे और आयरिस मशीन का बिल भी नहीं दिया गया है। इसके अलावा, कांटे का माप तोल विभाग द्वारा जारी प्रमाणपत्र भी उन्हें नहीं प्राप्त हुआ है।

ज्ञापन में राशन डीलर्स ने मुख्यमंत्री से निवेदन किया है कि उनकी मांगों को शीघ्र पूरा किया जाए और राशन डीलर्स के शोषण को रोका जाए। डीलर्स का कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे उग्र आंदोलन करने पर मजबूर हो सकते हैं।

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राशन डीलर्स की मांगें

  1. वितरण का पूरा कमीशन समय पर दिया जाए।
  2. गेहूं को दुकानों पर तुलवाने की व्यवस्था शीघ्र लागू की जाए।
  3. 2016 के बाद से वितरण में होने वाली छीजत की राशि दी जाए।
  4. पोस मशीन की कटौती को रोका जाए और उसका सही हिसाब दिया जाए।
  5. कांटे और आयरिस मशीन की खरीद और माप तोल विभाग द्वारा प्रमाणपत्र की व्यवस्था की जाए।

राशन डीलर्स का आरोप

  • उन्हें मानसिक अवसाद से ग्रस्त किया जा रहा है।
  • अधिकारियों द्वारा बार-बार आश्वासन देने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया गया।
  • उनकी कमाई का शोषण हो रहा है और उन्हें उचित भुगतान नहीं मिल रहा है।

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