चिड़ावा में ‘श्रीराम परिवार’ की प्रेरक पहल: हर रविवार गोसेवा से समाज में दें रहे संवेदना और करुणा का संदेश

चिड़ावा: शहर में सामाजिक और धार्मिक मूल्यों से प्रेरित श्रीराम परिवार हर रविवार एक अनूठी मिसाल कायम कर रहा है। यह परिवार नियमित रूप से गोसेवा अभियान, पर्यावरण संरक्षण, और सामाजिक एकता को आगे बढ़ा रहा है। इस रविवार भी परिवार के सदस्यों ने गौमाता की सेवा, पूजा-अर्चना और पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम का संदेश देकर समाज में करुणा और सकारात्मकता का संचार किया।

श्रीराम परिवार की इस सेवा परंपरा ने समाज में एक नई चेतना जगाई है। प्रत्येक रविवार को परिवार के सभी सदस्य शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचे और गौमाता को ताज़ी हरी सब्ज़ियां खिलाईं। इस अवसर पर सभी ने मिलकर विधिवत पूजा-अर्चना की और गौवंश के उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना की। परिवार का मानना है कि गोसेवा केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि यह समाज में करुणा और सह-अस्तित्व की भावना को भी मजबूत करती है।

श्रीराम परिवार के सदस्यों ने न केवल गोसेवा की, बल्कि पक्षियों को दाना डालकर पर्यावरण और जीव-जंतुओं के संरक्षण का संदेश भी दिया। उनका कहना है कि सप्ताह में कम से कम एक दिन प्रकृति और पशु-पक्षियों की सेवा के लिए समर्पित करना चाहिए। इस पहल ने चिड़ावा के युवाओं में पर्यावरण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी का भाव भी बढ़ाया है।

इस साप्ताहिक सेवा अभियान में सुरजीत सैनी, सुनील शर्मा, पवन शर्मा नवहाल, अमित चोटियां, कृष्ण स्वामी, राहुल सोलंकी, धर्मेंद्र चेजारा, रजनीकांत मिश्रा, मुकेश पारीक, मनीष शर्मा, सत्यनारायण वर्मा टिल्लू, डॉ. चंद्रमोली पचरंगिया, नितेश जांगिड़, मनीष जांगिड़, और पार्षद शशिकांत कुमावत प्रमुख रूप से शामिल रहे।

इनके साथ मनन पारीक, जतिन सैनी, यश वर्मा, अनमोल शर्मा, और जिया शर्मा सहित अन्य बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लेकर यह दिखाया कि संवेदना की भावना उम्र पर निर्भर नहीं करती। सभी की एकजुटता और समर्पण ने समाज में एक सकारात्मक उदाहरण स्थापित किया है।

परिवार के सदस्यों ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल गोसेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि इस माध्यम से वे समाज में सेवा, करुणा और पर्यावरणीय जागरूकता को मजबूत करना चाहते हैं। उन्होंने संकल्प लिया है कि आने वाले समय में इस सेवा अभियान को और व्यापक स्तर पर जारी रखेंगे, ताकि चिड़ावा शहर प्रेम, सद्भावना और सामाजिक एकता की मिसाल बन सके।

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