Thursday, February 12, 2026
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खेतड़ी वन क्षेत्र में अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई, गुप्त सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने छापेमारी कर खनन माफिया के मंसूबे किए नाकाम, जेसीबी और तीन ट्रैक्टर जब्त, चार लोग हिरासत में

खेतड़ी: उपखंड के गोठड़ा क्षेत्र की पहाड़ियों में जारी अवैध खनन पर वन विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए सोमवार को एक जेसीबी और तीन ट्रैक्टरों को जब्त किया है। यह कार्रवाई खेतड़ी वन क्षेत्र में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद की गई, जहां खनन माफिया राज्य सरकार के स्पष्ट प्रतिबंधों के बावजूद गतिविधियां संचालित कर रहे थे।

रेंजर विजय कुमार फगेड़िया ने बताया कि विभाग को सूचना मिली थी कि गोठड़ा की पहाड़ियों में खनन गतिविधि चल रही है। जैसे ही विभाग की टीम मौके पर पहुंची, वहां अवैध खनन में संलिप्त लोग घबरा गए और भागने लगे। हालांकि टीम ने एक जेसीबी मशीन, जिसमें ग्रेवाल उखाड़ी जा रही थी, के साथ तीन ट्रैक्टरों को मौके से जब्त कर लिया।

विभाग ने मौके से राहुल, बलवंत, नागरमल और अशोक कुमार को हिरासत में लिया है, जिनसे पूछताछ जारी है। इनके खिलाफ वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है। यह पूरी कार्रवाई एसीसीएफ और डीएफओ के निर्देशों के तहत संचालित विशेष अभियान का हिस्सा थी, जिसके अंतर्गत खेतड़ी वन क्षेत्र में पांच टीमें गठित की गई हैं।

रेंजर ने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र में अवैध खनन की गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए जिले स्तर पर एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है। अभियान के तहत बीती रात भी एक अन्य जेसीबी मशीन जब्त की गई थी, जो पहाड़ी क्षेत्र से पत्थर उखाड़ने में लगी हुई थी। दोपहर को गोठड़ा से पकड़ी गई जेसीबी और ट्रैक्टरों को रेंज कार्यालय खेतड़ी में लाकर सील किया गया है।

कार्रवाई के दौरान रेंजर विजय कुमार फगेड़िया के साथ सत्यवान पूनिया, संजय कुमार, महिपाल सिंह रिणवा सहित वन विभाग के अन्य कर्मचारी भी मौजूद रहे। यह छापेमारी राज्य सरकार की उस नीति का हिस्सा है, जिसमें प्रतिबंधित वन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि को लेकर जीरो टॉलरेंस अपनाने की बात कही गई है।

इस कार्रवाई से एक ओर जहां खनन माफियाओं में हड़कंप मचा है, वहीं सवाल यह भी उठता है कि इतने संवेदनशील और प्रतिबंधित क्षेत्र में भारी मशीनरी के साथ खनन कैसे संभव हुआ और इसे कौन संरक्षण दे रहा था। वन विभाग की इस कार्रवाई को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक जरूरी कदम माना जा रहा है, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि यदि प्रशासन ने समय रहते सख्ती नहीं बरती, तो यह फर्जी माफियातंत्र जंगलों और पारिस्थितिकी के लिए गंभीर खतरा बन सकता है

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