20 मई को एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान

खेतड़ी, 3 मई 2025: कॉल इंडिया कॉर्पोरेशन (KCC) प्रोजेक्ट प्रशासन भवन के समक्ष केटीएसएस (KTSS) श्रमिक संगठन के पदाधिकारियों द्वारा एक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें 20 मई को होने वाली एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के संदर्भ में कार्यकर्ताओं को दिशा-निर्देश दिए गए। यह हड़ताल केंद्रीय श्रम संगठन के आह्वान पर आयोजित की जा रही है, जिसमें विभिन्न राष्ट्रीय और स्थानीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया जाएगा।

बैठक की अध्यक्षता एसएन गर्वा ने की, जबकि केटीएसएस के महामंत्री बिडदुराम सैनी ने उपस्थित श्रमिकों को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि यह हड़ताल 17 राष्ट्रव्यापी, 5 स्थाई कामगारों से जुड़ी, 18 ठेका श्रमिकों, और 5 अन्य मांगों को लेकर की जा रही है।

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मुख्य मांगें इस प्रकार हैं

  • केसीसी खदानों का विकास एवं विस्तार
  • तांबे व अन्य क्रिटिकल मेटल के लिए खनिज लीज का आवंटन
  • केसीसी प्लांटों में तकनीकी उपकरणों से उत्पादन में बढ़ोतरी
  • भारत सरकार की पीएलआई स्कीम के तहत सेमीकंडक्टर निर्माण प्लांट की स्थापना
  • कुंभाराम लिफ्ट योजना से जल आपूर्ति 4 MLD से बढ़ाकर 10 MLD करने की मांग
  • स्थाई कामगारों की नई भर्ती प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने की मांग
  • ग्रेज्युटी की सीमा 20 लाख रुपये करने तथा 1 नवंबर 2017 से लागू करने की मांग
  • 50% डीए वृद्धि पर ग्रेज्युटी की सीमा 25 लाख रुपये करने की मांग
  • HCL अंशदायी पेंशन योजना 2007 से लागू करने की मांग
  • अस्पताल की सेवाओं का विस्तार एवं उच्च गुणवत्ता की दवाएं उपलब्ध कराने की मांग
  • रेफरल सुविधा के साथ कर्मचारियों के लिए नि:शुल्क इलाज सुनिश्चित करने की मांग
  • वेतन से किसी प्रकार की कटौती नहीं करने की मांग
  • कामगारों के लिए PRP या स्थाई परफॉर्मेंस रिवाइज स्कीम को लागू करने की मांग

ज्ञापन सौंपा गया

बैठक के अंत में सभी श्रमिकों की सहमति से केसीसी कार्यपालक निदेशक के नाम एक मांग पत्र एवं हड़ताल संबंधी ज्ञापन सौंपा गया। इसमें स्पष्ट किया गया कि यदि मांगें पूरी नहीं की जाती हैं, तो 20 मई को श्रमिक संगठित रूप से काम बंद कर देंगे।

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संगठन की चेतावनी

बिडदुराम सैनी ने कहा कि “यदि श्रमिकों की लंबे समय से लंबित मांगों की अनदेखी की जाती रही, तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जाएगा।” उन्होंने कहा कि हड़ताल लोकतांत्रिक तरीके से की जाएगी लेकिन सरकार व प्रशासन को श्रमिकों की पीड़ा को गंभीरता से लेना होगा।

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