कनाडा: कनाडा में हाल ही में संपन्न हुए आम चुनावों में न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) को भारी झटका लगा है। पार्टी के प्रमुख और खालिस्तान समर्थक माने जाने वाले भारतीय मूल के नेता जगमीत सिंह को बर्नबी सेंट्रल सीट से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है। इस हार के बाद सिंह ने पार्टी प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया है।

लिबरल उम्मीदवार वेड चांग ने दी शिकस्त

ब्रिटिश कोलंबिया के बर्नबी सेंट्रल सीट पर जगमीत सिंह को लिबरल पार्टी के उम्मीदवार वेड चांग ने कड़ी टक्कर दी। वेड चांग को 40 प्रतिशत से अधिक वोट मिले, जबकि जगमीत सिंह महज 27 प्रतिशत वोट ही हासिल कर पाए। सिंह इस सीट से तीसरी बार जीत की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन इस बार जनता ने उन्हें नकार दिया।

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एनडीपी खोने जा रही राष्ट्रीय दर्जा

एनडीपी के लिए यह चुनाव ऐतिहासिक रूप से निराशाजनक रहा। पार्टी को केवल 7 सीटों पर जीत मिली है, जबकि राष्ट्रीय दर्जा बनाए रखने के लिए कम से कम 12 सीटें जीतना अनिवार्य होता है। 2019 के चुनावों में एनडीपी ने 24 सीटें जीती थीं, लेकिन 2025 में यह संख्या घटकर 7 पर आ गई, जिससे पार्टी का राष्ट्रीय दर्जा समाप्त होने की कगार पर है।

जगमीत सिंह ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर साझा की प्रतिक्रिया

हार के बाद जगमीत सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा,

“मैं जानता हूं कि यह रात न्यू डेमोक्रेट्स के लिए निराशाजनक है। लेकिन हम तभी हारते हैं जब हम उन लोगों पर विश्वास करते हैं जो हमें बताते हैं कि हम कभी भी बेहतर कनाडा का सपना नहीं देख सकते हैं।”
46 वर्षीय सिंह ने यह भी जोड़ा कि वह पार्टी की सीटें न जीत पाने से निराश हैं, लेकिन पार्टी और आंदोलन को लेकर उनकी उम्मीदें अभी समाप्त नहीं हुई हैं।

मार्क कार्नी बने कनाडा के नए प्रधानमंत्री

चुनाव परिणामों के अनुसार, लिबरल पार्टी ने 165 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है। इस प्रकार पार्टी ने लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी की है। उल्लेखनीय है कि जनवरी 2025 में जस्टिन ट्रूडो ने लिबरल पार्टी के नेतृत्व और प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद पूर्व बैंक ऑफ कनाडा गवर्नर मार्क कार्नी ने पार्टी की कमान संभाली थी। अब चुनावी जीत के बाद वह कनाडा के नए प्रधानमंत्री बन गए हैं।

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जस्टिन ट्रूडो और एनडीपी का समीकरण टूटा

पिछले कई वर्षों से जस्टिन ट्रूडो की सरकार एनडीपी के समर्थन से चल रही थी। अब जबकि एनडीपी कमजोर हो चुकी है और जगमीत सिंह की हार हुई है, उस गठबंधन की राजनीति पर भी विराम लग गया है। ट्रूडो स्वयं भी चुनाव में करारी हार झेल चुके हैं।

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