अमेरिका: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी शपथ लेने के बाद बांग्लादेश सरकार को एक बड़ा झटका दिया है। ट्रंप ने अमेरिकी एजेंसी यूएसएआईडी के माध्यम से बांग्लादेश में सभी सहायता को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया है। इस निर्णय के तहत बांग्लादेश में अनुबंधों, कार्य आदेशों, अनुदानों, सहकारी समझौतों और अन्य सहायता या खरीद उपकरणों के तहत किसी भी काम को फौरन निलंबित किया जाएगा।

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यूएसएआईडी ने जारी किया आदेश

यूएसएआईडी ने एक आधिकारिक पत्र जारी करते हुए कहा, “यह पत्र सभी यूएसएआईडी/बांग्लादेश कार्यान्वयन भागीदारों को आपके अनुबंध, कार्य आदेश या अन्य सहायता के तहत किसी भी काम को तत्काल प्रभाव से बंद करने या निलंबित करने का निर्देश देता है।” इस निर्णय का मुख्य कारण बांग्लादेश में हिंदू समुदाय और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों को माना जा रहा है, जिसकी आलोचना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई थी, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल थे।

बांग्लादेश में कट्टरपंथियों की हिंसा का विरोध

पिछले कुछ समय में बांग्लादेश में कट्टरपंथी तत्वों ने शेख हसीना सरकार के खिलाफ हिंसा भड़काई और विशेष रूप से हिंदू समुदाय के खिलाफ अत्याचार किए। इसके परिणामस्वरूप कई धार्मिक स्थलों को भी नष्ट कर दिया गया और हिंदू नागरिकों की हत्या की गई। इन घटनाओं के बाद, बांग्लादेश सरकार के खिलाफ दुनियाभर में कड़ी आलोचना हुई थी। विशेषकर डोनाल्ड ट्रंप ने बांग्लादेश में कट्टरपंथी वामपंथी एजेंडे को खारिज करने और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संबंधों को मजबूत करने का संकल्प लिया था।

ट्रम्प का बड़ा कदम: अमेरिकी विदेश नीति में बदलाव

ट्रम्प ने 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद अपनी विदेश नीति की समीक्षा करते हुए अमेरिकी विदेश विकास सहायता पर 90 दिनों तक रोक लगाने का आदेश दिया था। इसके बाद से बांग्लादेश में अमेरिका द्वारा वित्त पोषित परियोजनाओं और गैर सरकारी संगठनों में घबराहट का माहौल है।

मोहम्मद यूनुस के लिए नई चुनौती

बांग्लादेश पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है और अब अमेरिकी सहायता पर इस रोक के कारण मोहम्मद यूनुस की सरकार को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। यूएसएआईडी के इस आदेश के बाद बांग्लादेश में चल रही कई परियोजनाओं पर असर पड़ने की संभावना है, जिनका वित्तपोषण अमेरिका द्वारा किया जा रहा था।

भारत और अमेरिका के बीच बातचीत

भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों पर चिंता जताई थी और इस मुद्दे पर भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो से मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद, ट्रंप का यह फैसला आया है, जो बांग्लादेश की वर्तमान सरकार के लिए एक और कड़ा झटका साबित हो सकता है। जयशंकर ने इस मुलाकात में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर संक्षिप्त चर्चा की थी, हालांकि उन्होंने इस पर अधिक जानकारी देने से इनकार किया।

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