अमृतसर, पंजाब: अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे भारतीय नागरिकों के खिलाफ सख्ती बढ़ा दी गई है। रविवार, 23 फरवरी को चार और भारतीय युवकों को निर्वासित किया गया, जिनमें से सभी पंजाब के विभिन्न जिलों के रहने वाले हैं। इन युवकों में दो गुरदासपुर, एक जालंधर और एक नाभा और पटियाला का निवासी है।

दिल्ली एयरपोर्ट से अमृतसर तक का सफर

बताया जा रहा है कि इन चारों युवकों को दिल्ली एयरपोर्ट से अमेरिका से पैसेंजर फ्लाइट में भेजा गया और फिर इंडिगो की डोमेस्टिक फ्लाइट से अमृतसर एयरपोर्ट के लिए रवाना कर दिया गया। अमृतसर पहुंचने पर इन चारों युवकों को पंजाब पुलिस ने अपनी कस्टडी में ले लिया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि इनका क्रिमिनल बैकग्राउंड चेक करने के बाद इन्हें उनके परिवारवालों के हवाले कर दिया जाएगा।

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हाथों में हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां

जानकारी के मुताबिक, अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे लगभग 18,000 भारतीय नागरिकों को वापस भेजा जाएगा। अब तक कुल 336 भारतीयों को निर्वासित किया जा चुका है, जिनमें से चार पंजाबियों को रविवार को अमेरिका से वापस भेजा गया। इससे पहले 15 फरवरी को रात 11:30 बजे, 116 भारतीयों के दूसरे जत्थे को लेकर एक अमेरिकी विमान अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरा था। इन सभी पुरुषों को हाथों में हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां बांधकर विमान में चढ़ाया गया था, जबकि महिलाओं और बच्चों को इस कड़ी प्रक्रिया से बाहर रखा गया। हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद, उन्हें लगभग 5 घंटे की जांच के बाद पुलिस वाहनों से उनके घरों तक भेज दिया गया।

पिछली घटनाओं पर भी विवाद

इससे पहले 5 फरवरी को 104 भारतीयों को जबरन निर्वासित किया गया था। इस दौरान भी पुरुष और महिलाओं को बच्चों को छोड़कर हथकड़ी और बेड़ियों में बांधकर भेजा गया था। इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस ने तीखी आलोचना की थी और आरोप लगाया था कि अमेरिका ने भारत का अपमान किया है।

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सीएम भगवंत मान का बयान

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस घटनाक्रम पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि जब 33 में से अधिकतर लोग हरियाणा और गुजरात से थे, तो विमान को पंजाब के अमृतसर में क्यों उतारा गया? उनका मानना था कि विमान को अहमदाबाद या अंबाला में उतारना चाहिए था, लेकिन इस जत्थे में सबसे बड़ी संख्या पंजाबियों की थी।

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अवैध आप्रवासियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई

20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद, डोनाल्ड ट्रंप ने अवैध आप्रवासियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। उनके इस आदेश के बाद अमेरिका में अवैध रूप से रहने वाले अप्रवासियों को बाहर निकाला जा रहा है। ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान के दौरान वादा किया था कि वह अवैध आप्रवासियों को देश से बाहर करेंगे, क्योंकि उनका मानना था कि ये लोग अमेरिका में अवैध रूप से प्रवेश करते हैं और अपराध करते हैं, जिसके कारण अमेरिकियों को नौकरियों की कमी का सामना करना पड़ता है।

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