अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध फिर तेज़, ट्रंप ने नए टैरिफ को 90 दिन के लिए टाला, लेकिन चीन पर लगाया 125% टैक्स

वॉशिंगटन, अमेरिका: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और घरेलू उद्योगों पर पड़ते दबाव को देखते हुए टैरिफ को लेकर बड़ा फैसला लिया है। ट्रंप ने घोषणा की है कि नए आयात शुल्क (टैरिफ) को 90 दिनों के लिए टाल दिया गया है। यह कदम ऐसे समय में लिया गया है जब अमेरिकी बाजार में मंदी के संकेत दिखने लगे हैं और व्यापारिक समुदाय में चिंता बढ़ रही है। वहीं, दूसरी ओर अमेरिका चीन पर पहले से लागू टैरिफ को बढ़ाकर 125 प्रतिशत तक कर चुका है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव और अधिक गहराता जा रहा है।

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एलन मस्क और बिल एकमैन की अपील का दिखा असर

इस टैरिफ टालने के निर्णय के पीछे ट्रंप के करीबी और टेस्ला प्रमुख एलन मस्क की अपील को भी अहम माना जा रहा है। मस्क ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया था कि पारस्परिक शुल्कों पर पुनर्विचार किया जाए ताकि अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र को राहत मिल सके। इसके साथ ही अरबपति निवेशक बिल एकमैन ने भी सार्वजनिक रूप से नए टैरिफ को 90 दिन के लिए स्थगित करने की सिफारिश की थी, जिस पर अब अमल होता दिख रहा है।

चीन ने जताई कड़ी आपत्ति, लगाया ‘आर्थिक दादागिरी’ का आरोप

अमेरिका द्वारा चीन पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ के विरोध में बीजिंग से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि अमेरिका का यह कदम एकतरफा, संरक्षणवादी और आर्थिक दादागिरी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि “अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के स्थान पर ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति अपनाना वैश्विक उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता को नुकसान पहुंचा रही है।”

लिन जियान ने आगे कहा, “दबाव और धमकियां चीन से निपटने का तरीका नहीं हैं। हम अपने अधिकारों और राष्ट्रीय हितों की दृढ़ता से रक्षा करते रहेंगे।”

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टेस्ला और अन्य अमेरिकी कंपनियों पर असर

अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव का सीधा असर टेस्ला, एप्पल, जनरल मोटर्स जैसी अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर भी देखा जा रहा है। टेस्ला, जो चीन में उत्पादन के लिए भारी निवेश कर चुकी है, अब टैरिफ वृद्धि के कारण लागत में बढ़ोतरी और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान से जूझ रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि व्यापार युद्ध यूं ही चलता रहा तो इससे वैश्विक तकनीकी और ऑटोमोबाइल उद्योगों को गंभीर नुकसान हो सकता है।

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