झुंझुनू: अमृतसर में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा तोड़े जाने की घटना पर झुंझुनू की अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्याचार विरोधी संघर्ष समिति ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। समिति ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

क्या है मामला?

पंजाब के अमृतसर में कुछ दिन पहले बाबा साहेब की प्रतिमा तोड़ी गई थी। इस घटना के बाद देशभर में रोष व्याप्त है। झुंझुनू की संघर्ष समिति ने भी इस घटना की निंदा की है और कहा है कि यह देशद्रोह का कृत्य है।

ज्ञापन में क्या कहा गया?

समिति ने अपने ज्ञापन में कहा है कि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर भारत के संविधान निर्माता थे और उन्होंने देश के दलितों और वंचित वर्गों के लिए बहुत कुछ किया। उनकी प्रतिमा तोड़ना देश के संविधान का अपमान है। समिति ने राष्ट्रपति से मांग की है कि इस घटना की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।

ज्ञापन सौंपने वालों में कौन-कौन शामिल थे?

ज्ञापन सौंपने वालों में समिति के अध्यक्ष रामानंद आर्य के अलावा संरक्षक प्रोफेसर जयलाल सिरोवा, बलबीर सिंह काला, सेवानिवृत्त डिप्टी निरंजन प्रसाद आल्हा, जिला महासचिव विकास आल्हा, कोषाध्यक्ष देवकरण सिंह महेरिया, विधि सलाहकार एडवोकेट सीताराम सेवदा, मीडिया प्रभारी अभिषेक, एडवोकेट सुनील सेवदा, सुभाष चंद्र मारिगसर, एडवोकेट मंजू बरवड़, रामप्रताप बरवड़, सवाई सिंह सर्वा, रामकरण नारनौलिया, सतवीर बरवड़, अशोक, जगदीश बेरवाल, संजय शास्त्री, वीरेन्द्र मीणा, महेंद्र सिंह चारावास, सरदार सिंह बलान, बी एल बौद्ध, धर्मपाल शीला, अम्मीलाल गोठवाल, लीलाधर चौहान, नाहरसिंह आदि शामिल थे।

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