मुंबई: समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक अबू आजमी द्वारा मुगल शासक औरंगजेब की प्रशंसा करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और महाराष्ट्र सरकार के नेताओं ने उनके बयान की कड़ी आलोचना की है और उनसे माफी की मांग की है।

अबू आजमी का बयान और विवाद की शुरुआत

सोमवार को अबू आजमी ने बॉलीवुड फिल्म छावा के संदर्भ में कहा कि इतिहास को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि औरंगजेब को केवल एक क्रूर शासक के रूप में दिखाया जाता है, जबकि उसने कई मंदिरों का निर्माण कराया था और वह केवल सत्ता के लिए संघर्ष कर रहा था।

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आजमी ने यह भी कहा कि औरंगजेब के शासनकाल में भारत की सीमाएं अफगानिस्तान और बर्मा तक फैली हुई थीं और उस समय देश की जीडीपी 24% थी। उन्होंने कहा, “भारत को ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाता था। क्या मुझे इन सभी चीजों को गलत कहना चाहिए?”

इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि छत्रपति संभाजी महाराज और औरंगजेब के बीच की लड़ाई धर्म को लेकर नहीं थी, बल्कि यह सत्ता संघर्ष था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय के शासक सत्ता और धन के लिए लड़ते थे, न कि धर्म के लिए।

बीजेपी और शिवसेना ने जताई नाराजगी

अबू आजमी के इस बयान पर बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

शिंदे सरकार ने देशद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग की

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अबू आजमी के बयान को ‘गलत और अस्वीकार्य’ बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “औरंगजेब ने छत्रपति संभाजी महाराज को 40 दिनों तक प्रताड़ित किया था। ऐसे व्यक्ति की प्रशंसा करना सबसे बड़ा पाप है। अबू आजमी को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए।”

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बीजेपी ने साधा निशाना

बीजेपी विधायक राम कदम ने भी अबू आजमी के बयान की निंदा करते हुए कहा, “आजमी को इतिहास की पूरी जानकारी होने के बावजूद वे इस तरह के बयान दे रहे हैं। हम उन्हें सदन में इतिहास की किताब भेंट करेंगे ताकि वे सही तथ्य जान सकें।”

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