शिमला में डॉक्टर ने गोद ली 10 वर्षीय बेटी को बेरहमी से पीटा, बचाने की बजाय मां बनी रही मूकदर्शक, वीडियो वायरल होने पर मचा हड़कंप

शिमला, 22 जून: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से एक अमानवीय घटना सामने आई है, जिसने माता-पिता और बच्चों के रिश्ते की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक डॉक्टर द्वारा अपनी 10 वर्षीय गोद ली हुई बेटी को डंडे से बुरी तरह पीटे जाने का वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें मासूम बच्ची डर के मारे दीवार के कोने में छिपती नजर आ रही है, लेकिन उस पर हो रही मार से कोई राहत नहीं मिलती।

यह घटना शिमला के एक आवासीय क्षेत्र में उस समय हुई, जब डॉक्टर अपनी पत्नी और बेटी के साथ एक रिश्तेदार के घर आया हुआ था। बताया गया है कि आरोपी डॉक्टर चंडीगढ़ के सेक्टर-15 का निवासी है और मूल रूप से शिमला से ही ताल्लुक रखता है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वह बच्ची पर लगातार डंडे बरसाता है, जबकि वहीं मौजूद महिला, जो उसकी पत्नी और बच्ची की मां बताई जा रही है, मूकदर्शक बनी रहती है।

वीडियो में एक और व्यक्ति मौके पर आता है और बच्ची को बचाने का प्रयास करता है, लेकिन डॉक्टर का आक्रोश कम नहीं होता। इस मारपीट की रिकॉर्डिंग पास में रहने वाले एक पड़ोसी ने की, जिसने बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। इसके बाद मामला तेजी से फैल गया और लोगों में आक्रोश उत्पन्न हो गया।

जानकारी के अनुसार, बच्ची को इस दंपति ने सात वर्ष पहले गोद लिया था, जब वह केवल तीन साल की थी। माना जा रहा था कि गोद लेकर उसे एक बेहतर जीवन दिया जाएगा, लेकिन वीडियो में जो दृश्य सामने आए हैं, वे इस रिश्ते को कलंकित करने वाले हैं। बच्ची की चीखें, उसका भयभीत चेहरा और मदद की उम्मीद में उसकी नजरें, वीडियो देखने वालों को झकझोर देती हैं।

घटना का वीडियो सामने आने के तुरंत बाद शिमला और चंडीगढ़ पुलिस हरकत में आ गई। चंडीगढ़ प्रोटेक्शन फॉर चाइल्ड राइट्स की चेयरपर्सन शिप्रा बंसल ने इसे अत्यंत गंभीर मामला बताते हुए तत्काल हस्तक्षेप किया और संबंधित विभागों को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने भी जांच शुरू कर दी है और डॉक्टर व उसकी पत्नी से पूछताछ की जा रही है।

बच्ची की सुरक्षा को प्राथमिकता मानते हुए संबंधित एजेंसियों ने उसे संरक्षण में ले लिया है। मामले में आगे की कार्रवाई जारी है। मानवाधिकार संगठनों और बाल संरक्षण कार्यकर्ताओं ने इस घटना को अत्यंत निंदनीय बताते हुए सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

यह घटना न केवल एक बच्ची की पीड़ा को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि किस प्रकार समाज में आज भी कुछ लोग गोद लिए गए बच्चों को अधिकारों से वंचित रख, उन्हें हिंसा का शिकार बना रहे हैं। मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया की दिशा अब सभी की नजर में है।

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