पिलानी: में अजेय योद्धा महाराजा सूरजमल के 262वें बलिदान दिवस पर राष्ट्रीय जाट महासंघ के कार्यकर्ताओं ने श्रद्धा और सम्मान के साथ कार्यक्रम आयोजित किया। बस स्टैंड के समीप सनशाईन होटल में हुए इस आयोजन में महाराजा सूरजमल के जीवन, आदर्शों और उनके समरसतामूलक शासन पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने उन्हें सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण और हिंदू संस्कृति के संरक्षक के रूप में याद किया, जिससे उपस्थित लोगों में राष्ट्र और समाज के प्रति नई ऊर्जा का संचार हुआ।
पुष्पांजलि अर्पित कर दी गई श्रद्धांजलि
महाराजा सूरजमल के बलिदान दिवस के अवसर पर पिलानी में राष्ट्रीय जाट महासंघ से जुड़े कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी रोहिताश्व रणवा ने की, जिन्होंने अपने उद्बोधन में महाराजा सूरजमल को भारतीय इतिहास का ऐसा नायक बताया, जिसने सत्ता को सेवा और न्याय का माध्यम बनाया।
वक्ताओं ने बताया समरसता और दूरदर्शिता का इतिहास
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय जाट महासंघ के जिला सलाहकार राजेन्द्र बांगड़वा, ब्लॉक अध्यक्ष विरेन्द्र पूनियां, प्रभारी अत्तर सिंह काजला और युवा तेजा सेना के ब्लॉक अध्यक्ष अशोक बुडानिया ने महाराजा सूरजमल के जीवन वृत्तांत पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि उनका साम्राज्य सामाजिक समरसता का प्रतीक था, जहां सभी धर्मों और वर्गों को समान सम्मान और सुरक्षा प्राप्त थी।
गोवंश संरक्षण से लेकर पर्यावरण तक, समय से आगे सोच
वक्ताओं ने बताया कि महाराजा सूरजमल के शासनकाल में गोवध और पीपल वृक्ष काटने पर प्रतिबंध लगाया गया था, जो उस समय पर्यावरण संरक्षण और जीव रक्षा के प्रति उनकी दूरदर्शी सोच को दर्शाता है। यह निर्णय आज के समय में भी सतत विकास और प्रकृति संरक्षण की मिसाल माना जाता है।
मानवता की मिसाल बनी पानीपत के बाद की भूमिका
कार्यक्रम में यह भी उल्लेख किया गया कि पानीपत की लड़ाई में पराजित मराठाओं की महाराजा सूरजमल ने न केवल सहायता की, बल्कि उनका इलाज कराकर उन्हें सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की। वक्ताओं ने कहा कि यह घटना महाराजा सूरजमल के मानवीय दृष्टिकोण और पराक्रम के साथ करुणा के संतुलन को दर्शाती है।
हिंदू संस्कृति के संरक्षण में अहम योगदान
महाराजा सूरजमल द्वारा ब्रज क्षेत्र में अनेक मंदिरों का निर्माण कराए जाने का भी स्मरण किया गया। वक्ताओं ने कहा कि उनके प्रयासों से न केवल धार्मिक आस्था को बल मिला, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और संवर्धन भी हुआ।
बड़ी संख्या में समाज के लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर महिपाल जाखड़, करण सिंह पूनिया, भगवान सांगवान, बलबीर सिंह लोहान, राजवीर साईपंवार, उम्मेद सिंह काजला, धर्माराम पीटीआई, प्रमेंद्र काजला और पृथ्वी सिंह सहित राष्ट्रीय जाट महासंघ के कई प्रबुद्ध पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने महाराजा सूरजमल के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।





