कृषि भूमि पर अवैध निर्माणः एसडीएम के स्थगन आदेश की अवहेलना की शिकायत पर नायब तहसीलदार ने पीपली में रुकवाया काम

पिलानी: तहसील क्षेत्र के राजस्व गांव पीपली में एसडीएम के स्थगन आदेश की अवहेलना कर चलाए जा रहे अवैध निर्माण को नायब तहसीलदार ने रुकवा दिया है। मामले में अवैध निर्माण कर रहे व्यक्ति को पाबन्द किया गया है।

प्रकरण में ग्राम पीपली के किसान विवेक चौधरी द्वारा अपनी कृषि भूमि खसरा संख्या 1125/385 से सटी भूमि खसरा संख्या 1121/385 पर बिना सीमाज्ञान के किए जा रहे निर्माण के विरोध में शिकायत दर्ज करवाई गई थी। इसके बाद भी स्थानीय पटवारी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सीमाज्ञान कार्य प्रारंभ नहीं किया गया, जबकि किसान ने सरकार द्वारा निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से विधिपूर्वक आवेदन किया था।

शिकायतकर्ता ने जानकारी कि पटवारी जानबूझकर तथ्यों से परे तर्क देकर सीमाज्ञान में देरी कर रहा है, जिससे विवादित भूमि पर निर्माणकर्ता को अनुचित लाभ मिल रहा है। प्रशासन द्वारा एसडीएम सूरजगढ़ के स्थगन आदेश की पालना नहीं कराई गई, जबकि स्पष्ट निर्देश थे कि सीमाज्ञान पूर्ण होने तक कोई भी निर्माण कार्य न किया जाए।

पीड़ित विवेक चौधरी ने इस विषय में प्रशासन व पुलिस को प्रमाण सहित रजिस्टर्ड डाक एवं जीपीएस कैमरा युक्त फोटोग्राफ के साथ सूचना भेजी, लेकिन अवैध निर्माण बदस्तूर जारी रहा। चौधरी का कहना है कि सीमाज्ञान संबंधी ऑनलाइन आवेदन को लगातार टालते हुए पटवारी द्वारा गलत तथ्य दर्शाना, असत्य रिपोर्ट प्रस्तुत करना तथा एसडीएम सूरजगढ़ द्वारा पारित स्थगन आदेश (दिनांक 22 जुलाई 2025) की अवहेलना कराना, राजस्व प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।

परेशान विवेक चौधरी ने पिलानी तहसील कार्यालय में नायब तहसीलदार हरीश यादव को पटवारी द्वारा प्रस्तुत की गई तथ्यहीन व भ्रमित करने वाली रिपोर्ट तथा सीमाज्ञान प्रक्रिया में की गई अनावश्यक देरी की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। जिसके बाद नायब तहसीलदार ने प्रकरण को गंभीरता से सुनते हुए शीघ्र आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

मामले में नायब तहसीलदार हरीश यादव ने बताया कि पटवारी व गिरदावर को तुरन्त प्रभाव से अवैध निर्माण रोकने तथा भूमि का सीमा ज्ञान किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अवैध निर्माण कर रहे लोगों को पाबन्द किया गया है।

स्थानीय ग्रामीणों और किसान संगठनों ने मांग की है कि इस प्रकार की लापरवाही के लिए संबंधित अधिकारी व कार्मिकों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए, जिससे भविष्य में आमजन को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

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