Wednesday, February 18, 2026
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अमेरिकी सांसद का बड़ा बयान: भारत को नजरअंदाज करना रणनीतिक गलती

न्यूयॉर्क: अमेरिका में आयोजित एक प्रमुख रणनीतिक कार्यक्रम में अमेरिका के वरिष्ठ सांसद रिच मैककॉर्मिक ने स्पष्ट कहा कि भारत-अमेरिका साझेदारी को नजरअंदाज करना अमेरिका के लिए आर्थिक और सुरक्षा दृष्टिकोण से बड़ा नुकसान होगा। उन्होंने भारत की आर्थिक शक्ति, वैश्विक निवेश क्षमता और टेक्नोलॉजी प्रतिभा की जमकर सराहना की, साथ ही पाकिस्तान की तुलना में भारत को अमेरिका के लिए अधिक रणनीतिक साझेदार बताया।

भारत को नजरअंदाज करना अमेरिका के हित में नहीं

न्यूयॉर्क में वॉशिंगटन स्थित सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान, अमेरिकी सांसद रिच मैककॉर्मिक ने कहा कि भारत का वैश्विक निवेश आकर्षण, तकनीकी प्रतिभा, और आर्थिक विकास अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि भारत न केवल अपने नागरिकों को तकनीकी और शोध क्षेत्रों में प्रशिक्षित करता है, बल्कि ये प्रतिभाशाली लोग अमेरिका में उच्च तकनीकी, स्वास्थ्य और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

मैककॉर्मिक ने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार और आर्थिक साझेदारी अमेरिका की समग्र आर्थिक वृद्धि और रणनीतिक वैश्विक लक्ष्यों के लिए अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को नजरअंदाज करना अमेरिका को व्यापारिक, आर्थिक और वैश्विक रणनीति में नुकसान पहुंचा सकता है।

पाकिस्तान की तुलना में भारत की मजबूती पर जोर

कार्यक्रम के दौरान रिच मैककॉर्मिक ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और विदेशी निवेश पर टिप्पणी की और कहा कि “पाकिस्तान की आबादी लगभग 30 करोड़ होने के बावजूद वह अमेरिका में बड़ा निवेश नहीं कर रहा है।” इसके विपरीत, उन्होंने बताया कि भारत अमेरिका में बड़े स्तर पर निवेश को आकर्षित कर रहा है और खुद भी अमेरिका में भारी निवेश कर रहा है, जिससे भारत-अमेरिका आर्थिक सहयोग मजबूत हुआ है।

मैककॉर्मिक के अनुसार, भारत की युवा प्रतिभा और तकनीकी क्षमता ने अमेरिका को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर स्थान दिलाने में मदद की है, जो अब अमेरिका की रणनीतिक मजबूती का हिस्सा बन चुकी है।

भारतीय अमेरिकी सांसद अमी बेरा का समर्थन

कार्यक्रम में मौजूद भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद अमी बेरा ने रिच मैककॉर्मिक की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ किसी भी महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी पर काम नहीं कर रहा है। बेरा ने यह भी बताया कि अमेरिकी कंपनियां पाकिस्तान में अरबों डॉलर का निवेश नहीं कर रही हैं, जबकि वही निवेश भारत में जारी है, जिससे भारत-अमेरिका व्यापार और आर्थिक संबंध और अधिक मजबूत बन रहे हैं।

भारत-अमेरिका रिश्तों में टैरिफ विवाद और सुधार की उम्मीद

हाल के महीनों में भारत-अमेरिका रिश्तों में कुछ व्यापारिक तनाव भी देखने को मिले हैं। ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने के कारण कुल टैरिफ 50% तक पहुँच गया, जिसका कारण बताया गया कि भारत रूस से तेल की खरीद कर रहा है।

रिच मैककॉर्मिक ने इस मुद्दे पर कहा कि अमेरिका को भारत के रूस से सस्ता तेल खरीदने का तरीका पसंद नहीं है, लेकिन वे यह भी समझते हैं कि भारत अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए यह निर्णय ले रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “अच्छे मायनों में बेहद राष्ट्रवादी” बताते हुए कहा कि भारत की आर्थिक प्राथमिकताएं उसके राष्ट्रीय हितों को सुदृढ़ कर रही हैं।

भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी: आर्थिक, सुरक्षा और वैश्विक महत्व

भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग का प्रभाव केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तकनीकी, सुरक्षा, शोध, ऊर्जा और वैश्विक राजनीति के क्षेत्र में भी दिखता है। रिच मैककॉर्मिक और अमी बेरा जैसे सांसदों के स्पष्ट बयान इस ओर संकेत देते हैं कि भारत-अमेरिका संबंध 21वीं सदी की वैश्विक राजनीति और आर्थिक दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण पक्ष बन सकते हैं।

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