सूरजगढ़: काजड़ा पंचायत प्रशासक से जुड़ा बड़ा फैसला सामने आया है। राजस्थान उच्च न्यायालय जयपुर ने मंजू तंवर को प्रशासक पद से हटाने के सरकारी आदेश पर रोक लगा दी है। इस मामले ने स्थानीय राजनीति में चल रही उठा-पटक को फिर सामने ला दिया है।

सरपंच पद का कार्यकाल खत्म होने के बाद मंजू तंवर को पंचायत समिति सूरजगढ़ के अंतर्गत ग्राम पंचायत काजड़ा का प्रशासक नियुक्त किया गया था। मंजू तंवर के खिलाफ 08 अक्टूबर 2025 को हटाने का आदेश जारी हुआ था। इस आदेश को उनके अधिवक्ता हनुमान चौधरी, रवि कुमार पलसानिया और निखिल सैनी ने अदालत में चुनौती दी।

याचिका में तर्क दिया गया कि यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 और नियम 1996 के विपरीत थी। न तो चार्जशीट दी गई और न ही किसी प्रकार की जांच प्रक्रिया अपनाई गई, जिससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ।

अधिवक्ताओं ने पहले किए गए एक फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें महावीर प्रसाद गौतम बनाम राजस्थान राज्य के मामले में समान परिस्थिति में हटाने का आदेश रद्द किया गया था। उस आदेश के खिलाफ दायर विशेष अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी महत्वपूर्ण अंतरिम राहत दी गई थी।

प्रतिवादियों की ओर से कपिल प्रकाश माथुर, आशुतोष उदावत और नवीन धुआं ने पक्ष रखा।

न्यायमूर्ति अनूप सिंह ने तथ्यात्मक स्थिति को देखते हुए विवादित आदेश के प्रभाव और संचालन पर रोक लगा दी है। अब मामला 15 जनवरी 2026 को दोबारा सुना जाएगा।

काजड़ा पंचायत प्रशासन और स्थानीय राजनीतिक हलकों की निगाहें इस मामले की अगली सुनवाई पर टिकी हैं क्योंकि यह फैसला राजस्थान पंचायत प्रशासन के भविष्य के कई मामलों का मानक बन सकता है।

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