राजस्थान में बिजली बिलों और स्मार्ट मीटर को लेकर सियासत गरम, हनुमान बेनीवाल ने लगाए ऊर्जा मंत्री पर गंभीर आरोप, मंत्री ने दिया जवाब

जयपुर: राजस्थान में इन दिनों बिजली बिलों और स्मार्ट मीटरों को लेकर राजनीतिक तापमान चरम पर है। एक तरफ राज्य सरकार स्मार्ट मीटर योजना को लागू करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इस पर जमकर सवाल उठा रहा है। खासतौर पर सांसद हनुमान बेनीवाल और ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल ने अपने सरकारी आवास और सांसद कार्यालय की बिजली काटे जाने के बाद ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर पर दो लाख से अधिक का बकाया बिजली बिल होने का आरोप लगाया है। बेनीवाल ने आरोप लगाया कि मंत्री का जयपुर स्थित अस्पताल रोड के सरकारी आवास पर 2.17 लाख रुपये का बिजली बिल लंबित है। उन्होंने दस्तावेज दिखाते हुए सवाल उठाया कि क्या मंत्री का बिजली कनेक्शन भी उसी तरह काटा जाएगा, जैसे उनका काटा गया?

बेनीवाल ने यह भी दावा किया कि मंत्री के ज्योति नगर फ्लैट का बकाया बिल सरकारी खजाने से चुका दिया गया, जबकि अस्पताल रोड स्थित आवास का भुगतान सरकारी खजाने से करने का प्रयास अस्वीकार कर दिया गया। उनका कहना है कि सरकारी नियमों के अनुसार सरकार एक मंत्री के एक ही आवास का बिल चुकाने की अनुमति देती है।

इस पूरे मामले पर ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने सफाई देते हुए कहा कि उन पर कोई बकाया नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिल की अंतिम तिथि 17 जुलाई है और वह समय अभी आया नहीं है। मंत्री का कहना है कि सांसद बेनीवाल बिना तथ्यों के आरोप लगा रहे हैं और लोगों को गुमराह कर रहे हैं।

स्मार्ट मीटर योजना पर उठते सवालों का जवाब देते हुए ऊर्जा मंत्री ने बताया कि इस योजना की शुरुआत पिछली कांग्रेस सरकार के समय हुई थी। कांग्रेस सरकार के दौरान 5.30 लाख मीटर लगाए गए थे और वर्तमान में डेढ़ करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने की योजना भी उसी समय बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि मौजूदा भाजपा सरकार ने केवल उसी योजना को आगे बढ़ाया और कांग्रेस सरकार द्वारा जारी किए गए टेंडर को अंतिम रूप दिया।

इसी दौरान बेनीवाल ने खींवसर विधायक रेवंत राम डांगा पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक डांगा के नाम पर भी बकाया बिजली बिल है और नियमों की अनदेखी कर उन्हें कनेक्शन दिया गया है। इसके अलावा, उन्होंने डांगा पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अनियमितता और अवैध खनन में संलिप्तता का भी आरोप लगाया।

राजस्थान की राजनीति में बिजली अब सिर्फ ऊर्जा का नहीं, बल्कि आरोप-प्रत्यारोप और जवाबी दावों का मुद्दा बन गई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और विपक्ष इस बहस को किस दिशा में लेकर जाते हैं और इसका आम जनता पर क्या असर पड़ता है।

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