पिलानी, 1 मई 2025: अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस के अवसर पर झुंझुनूं जिले के पिलानी उपखंड स्थित गांव काजी में ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन की ओर से एक प्रभावशाली जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जय सिंह ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में जाने-माने मजदूर नेता कॉमरेड शंकर दहिया ने श्रम और पूंजी के संबंधों पर ऐतिहासिक और सामाजिक दृष्टिकोण से प्रकाश डाला।

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कॉमरेड शंकर दहिया का उद्बोधन

कॉमरेड दहिया ने कहा,

आज जो सुंदर और विकसित समाज हमारे सामने खड़ा है, वह मज़दूर वर्ग के कठिन श्रम का परिणाम है। ऊँची इमारतें, चौड़ी सड़कें और दौड़ती गाड़ियाँ किसी पूंजीपति की कृपा नहीं, बल्कि मजदूर की मेहनत की पहचान हैं।

उन्होंने 1886 के शिकागो आंदोलन को याद करते हुए बताया कि किस तरह से मजदूरों ने अपने खून से “8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे मनोरंजन” के सिद्धांत को स्थापित किया, लेकिन आज के भारत में ये अधिकार लगातार छीने जा रहे हैं।

कॉमरेड दहिया ने लेनिन के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा—

मजदूर के श्रम से पैदा हुई पूंजी ही उसे कुचलती है।

अन्य वक्ताओं का योगदान

कार्यक्रम को राजेंद्र सिहाग, महादेवाराम जांगिड़, प्रताप आलडिया और इंदर सिंह झेरली ने भी संबोधित किया। सभी ने एक स्वर में पूंजीवादी नीतियों की आलोचना करते हुए श्रमिक वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन तेज करने का आह्वान किया।

महादेवाराम जांगिड़ ने खासतौर पर नहर के पानी की समस्या को उठाते हुए कहा कि—

यह केवल जल संकट नहीं, बल्कि जीवन और आजीविका का प्रश्न है। इस संघर्ष को संगठित होकर ही जीता जा सकता है।

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ग्रामीण बैठक और जन आंदोलन की रणनीति:

कार्यक्रम के बाद गांववासियों के साथ एक विशेष बैठक का आयोजन हुआ, जिसमें नहर पानी के मुद्दे पर रणनीति तय की गई। उपस्थित जनों ने क्षेत्रीय स्तर पर जन आंदोलन को तेज करने और सरकार पर दबाव बनाने का निर्णय लिया।

उपस्थिति और समर्थन

कार्यक्रम में ग्रामीणों की भागीदारी उल्लेखनीय रही। प्रमुख उपस्थिति में थे:

  • अरुण सेन, सुनील कुमार, संदीप नायक, नंदलाल सैनी,
  • पवन कुमार, पप्पू मेघवाल, प्रताप पूनिया, विकास सेन
    सहित बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और सामाजिक कार्यकर्ता।

गूंजे नारे, बनी एकता की आवाज़

सभा के दौरान मजदूर एकता और संघर्ष के प्रतीक नारे गूंजते रहे:

  • “दुनिया के मजदूर एक हों”
  • “इंकलाब जिंदाबाद”
  • “मजदूर दिवस जिंदाबाद”

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