जेपी सेतु पर दरार से बिहार की सियासत में उबाल, उद्घाटन के तीन दिन बाद ही निर्माण कार्य पर उठे सवाल

3831 करोड़ की लागत से बने गंगा पथ में दरारें, चुनावी मौसम में NDA सरकार की साख पर संकट

पटना, बिहार: बिहार में छह महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की एनडीए सरकार द्वारा उद्घाटन और शिलान्यास की झड़ी लगाई जा रही है। ऐसे में पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा लोकार्पित की गई महत्वाकांक्षी जेपी गंगा पथ परियोजना (जेपी सेतु) में दरार आने से राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। मात्र तीन दिन पहले उद्घाटन किए गए इस पुल में दरारें सामने आने से ना सिर्फ सरकार की तकनीकी तैयारियों पर सवाल उठे हैं, बल्कि विपक्ष को भी सरकार पर हमलावर होने का मौका मिल गया है।

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जेपी गंगा पथ में दरारें, सरकार में मचा हड़कंप

राजधानी पटना के दीदारगंज क्षेत्र में स्थित गंगा पथ (मरीन ड्राइव) के पिलर संख्या A-3 के पास पुल की दोनों लेन में दरारें देखी गईं। सोशल मीडिया पर इस घटना का एक वीडियो वायरल हो गया, जिसमें पुल की सतह पर आई दरारें स्पष्ट रूप से देखी जा सकती हैं। स्थानीय नागरिकों ने जैसे ही दरारों की सूचना दी, वैसे ही बिहार राज्य सड़क विकास निगम (BSRDC) के इंजीनियरों की टीम और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए।

बीएसआरडीसी का स्पष्टीकरण: “यह दरार नहीं, स्ट्रक्चर गैप है”

BSRDC के प्रबंध निदेशक शीर्षत कपिल अशोक ने बताया कि यह दरार नहीं बल्कि स्ट्रक्चर और एप्रोच रोड के बीच का गैप है, जिसे तकनीकी दृष्टिकोण से रखा गया है ताकि मौसम के अनुसार विस्तार और संकुचन का समन्वय बना रहे। हालांकि जनता की चिंताओं को देखते हुए विभागीय स्तर पर जांच कराने का निर्णय लिया गया है। साथ ही IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से थर्ड पार्टी ऑडिट भी कराया जाएगा।

“लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। इंजीनियरों की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गैप को भर दिया है। यातायात सुचारु रूप से चल रहा है।”
शीर्षत कपिल अशोक, एमडी, बीएसआरडीसी

नितिन नवीन की सफाई: “पुल में कोई दरार नहीं”

राज्य के पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने भी मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि पुल की स्थिति सामान्य है और मंगलवार को वे स्वयं स्थल का निरीक्षण करेंगे। उन्होंने कहा कि यह घटना दो पिलरों के जोड़ के कारण हुई है और इसके पीछे किसी प्रकार की निर्माणीय कमजोरी की पुष्टि नहीं हुई है। विभाग को जांच के निर्देश दे दिए गए हैं और विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

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जनता में आक्रोश और विपक्ष का हमला

इस पुल के निर्माण में 3831 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, और इतने बड़े प्रोजेक्ट में महज तीन दिन बाद दरारें सामने आना आम जनता के बीच भ्रष्टाचार और निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। चूंकि यह चुनावी वर्ष है, ऐसे में विपक्षी दलों ने सरकार को निशाने पर ले लिया है।
राजद, कांग्रेस और वाम दलों के नेताओं ने सोशल मीडिया और प्रेस के माध्यम से इस परियोजना को “घोटाले का पुल” बताया है।

“तीन दिन भी नहीं चला करोड़ों की लागत से बना पुल? यह सिर्फ तकनीकी खामी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की दरार है।”
— विपक्षी प्रवक्ता, सोशल मीडिया पर

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