नीतीश कुमार की रणनीति पर सवाल, वक्फ बिल समर्थन के बाद जदयू में असंतोष अल्पसंख्यक नेताओं का इस्तीफा जारी

पटना, बिहार: वक्फ संशोधन बिल पर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के समर्थन के बाद पार्टी के भीतर नाराजगी का माहौल देखने को मिल रहा है। विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े जदयू के कई नेताओं ने इस फैसले का विरोध किया है। जहां पार्टी के बड़े नेता सार्वजनिक रूप से असहमति जता रहे हैं, वहीं इस्तीफों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। पार्टी के विभिन्न पदों पर कार्यरत कई अल्पसंख्यक नेताओं ने विरोध स्वरूप इस्तीफा दे दिया है।

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अल्पसंख्यक नेताओं की नाराजगी, इस्तीफों का सिलसिला जारी

वक्फ संशोधन बिल के पारित होने के तुरंत बाद जदयू के अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े नेताओं ने अपनी नाराजगी जाहिर की। ढाका विधानसभा क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी मो. कासिम अंसारी ने सबसे पहले पार्टी से इस्तीफा देते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र भेजा। उन्होंने कहा कि जदयू का यह निर्णय उनकी विचारधारा से मेल नहीं खाता और वे इससे आहत हैं।

कासिम अंसारी के बाद पार्टी के जमुई अल्पसंख्यक प्रदेश सचिव मो. शाहनवाज मलिक ने भी इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि जदयू का यह कदम अल्पसंख्यकों के विश्वास को ठेस पहुंचाने वाला है।

महासचिव मोहम्मद तबरेज भी हुए अलग

अल्पसंख्यक नेताओं के इस्तीफे का दौर यहीं नहीं रुका। जदयू अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव मोहम्मद तबरेज सिद्दकी अलीग ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा को भेज दिया। इस्तीफे के पीछे उन्होंने वक्फ संशोधन बिल को समर्थन देने को मुख्य कारण बताया।

शाहनवाज मलिक ने इस मुद्दे पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, “नीतीश कुमार ने हम मुसलमानों का दिल तोड़ दिया है। यही कारण है कि मैं और कई अन्य नेता अब जदयू को अलविदा कह रहे हैं।”

गुलाम रसूल बलियावी और अफजल अब्बास ने जताया विरोध

इससे पहले, पार्टी के वरिष्ठ अल्पसंख्यक नेता गुलाम रसूल बलियावी और विधायक गुलाम गौस ने भी इस बिल पर विरोध प्रकट किया था। बलियावी ने तीखा बयान देते हुए कहा, “कल तक जो सेक्युलर थे, वे अब कम्युनल हो गए हैं।” हालांकि, उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा स्पष्ट रूप से नीतीश कुमार और जदयू की ओर था।

इसी क्रम में बिहार राज्य शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन और जदयू नेता सैयद अफजल अब्बास ने भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जदयू ने इस बिल में सिर्फ तीन सुझाव शामिल किए, जबकि 14 सुझाव दिए गए थे। उन्होंने इसे जल्दबाजी में लाया गया बिल बताया।

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जदयू प्रवक्ता का पलटवार – इस्तीफे फर्जी

पार्टी में मचे इस घमासान के बीच जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने इन इस्तीफों को फर्जी करार दिया। उन्होंने कहा, “जो लोग इस्तीफे की बात कर रहे हैं, वे पार्टी संगठन का हिस्सा नहीं हैं। उन्हें पार्टी में कोई जानता तक नहीं है। जदयू पूरी तरह से एकजुट है और पार्टी में कोई फूट नहीं है।”

आरजेडी ने किया हमला, बीजेपी में विलय की संभावना जताई

जदयू में जारी अंदरूनी कलह को देखते हुए विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने इस मुद्दे पर जदयू पर हमला बोला। आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “जदयू ने जिस तरह से वक्फ बिल का समर्थन किया, उससे साफ हो गया कि वह बीजेपी के एक प्रकोष्ठ के रूप में काम कर रहा है। जल्द ही जदयू का बीजेपी में विलय हो जाएगा।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि जदयू के कई नेता आरजेडी के संपर्क में हैं और जल्द ही पार्टी छोड़ सकते हैं।

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