चिड़ावा थानाधिकारी के बेटे की गिरफ्तारी पर विवाद, पिता आशाराम गुर्जर ने साइबर थाना श्रीगंगानगर के उपाधीक्षक कुलदीप वालिया पर लगाए गंभीर आरोप महानिदेशक को लिखा पत्र

चिड़ावा, झुंझुनू (12 मार्च, 2025): चिड़ावा थाना के थानाधिकारी आशाराम गुर्जर ने अपने बेटे रवि की गिरफ्तारी को लेकर साइबर थाना श्रीगंगानगर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने झुंझुनूं के पुलिस अधीक्षक के माध्यम से महानिदेशक पुलिस को एक शिकायती पत्र भेजा है, जिसमें साइबर थाने के उपाधीक्षक कुलदीप वालिया और अन्य अधिकारियों पर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। पत्र में दावा किया गया है कि बेटे को फंसाया गया तथा मुख्य गवाह होने के बावजूद आरोपी बनाया गया।

आरोप के अनुसार, 12 दिसंबर, 2024 को आशाराम गुर्जर के मोबाइल नंबर पर एक कॉल आई, जिसमें चंद्रभान उपनिरीक्षक ने खुद को रिजर्व पुलिस लाइन श्रीगंगानगर का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके बेटे रवि के खिलाफ साइबर थाना श्रीगंगानगर में प्रकरण संख्या 14/2024, धारा 318-4, 308-6 बीएनएस 2023 के तहत मामला दर्ज हुआ है। चंद्रभान ने दावा किया कि वे गुर्जर के घर सी-18 शिवकोलोनी, एयरपोर्ट रोड, सांगानेर पर मौजूद हैं और रवि से पूछताछ की जरूरत है।

आशाराम ने बताया कि उन्होंने चंद्रभान को सूचित किया कि उनका बेटा रवि अहमदाबाद में एक कंपनी में नौकरी करता है और उसे तुरंत बुलाया जा रहा है। रवि से बात करने पर उसने खुलासा किया कि पिछले महीने जयपुर में उसका दोस्त यश पंजाबी, जो 2018 में नदबई के एसआरपीजी हॉस्टल में साथ पढ़ा था, उसके पास आया। यश ने रवि से कहा कि उसके खाते में दिक्कत है और परिवार ने बाहर से पैसे मंगवाए हैं। विश्वास में लेते हुए रवि ने अपना एचडीएफसी बैंक खाता नंबर दे दिया, जिसमें यश ने राशि जमा कराई। इसके बाद रवि, यश और उसका साथी बिट्टु जैन मानसरोवर और न्यू सांगानेर रोड की बैंक शाखाओं में गए, जहां रवि ने पैसे निकाले और उन्हें दोनों को दे दिए।

आशाराम ने दावा किया कि उन्होंने इसकी जानकारी कुलदीप वालिया को उनके नंबर पर दी। वालिया ने अपने सहकर्मी हरजिंदर, जो वर्तमान में झुंझुनूं पुलिस अधीक्षक कार्यालय में कार्यरत हैं, से बात की। हरजिंदर ने आशाराम से सारी स्थिति जानी और वालिया को मोबाइल पर सच्चाई बताई, जिसमें बताया गया कि रवि के साथ बैंक में यश और बिट्टु मौजूद थे। हालांकि, वालिया और उनकी टीम ने बैंक से सीसीटीवी फुटेज या अन्य साक्ष्य जुटाने की कोशिश नहीं की, जिससे समय बीतने के कारण साक्ष्य नष्ट हो गए।

जनवरी 2025 में जयपुर स्थित गुर्जर के घर साइबर थाना का एक कांस्टेबल पहुंचा और धारा 35-3 बीएनएसएस 2023 के नोटिस की तामील के लिए आया। नोटिस गुर्जर की पत्नी ने स्वीकार किया। इसके बाद रवि 24 जनवरी, 2025 को अहमदाबाद से श्रीगंगानगर साइबर थाने पहुंचा और वालिया को सारी जानकारी दी। वालिया ने रवि को यश और बिट्टु को पकड़वाने की सलाह देकर छोड़ दिया। बाद में यश को जयपुर सदर थाना पुलिस ने पकड़ा, लेकिन श्रीगंगानगर पुलिस की उदासीनता के कारण उसे छोड़ दिया गया।

10 मार्च, 2025 को रवि भटिंडा, पंजाब होकर श्रीगंगानगर पहुंचा। शाम तक उसका फोन बंद आने पर आशाराम ने वालिया से संपर्क किया, तो वालिया ने बताया कि रवि को गिरफ्तार कर लिया गया है और अब वे कोई मदद नहीं कर सकते। 12 मार्च, 2025 को समाचार पत्रों व सोशल मीडिया पर यह खबर बढ़ा-चढ़ाकर छपी कि चिड़ावा थानाधिकारी का बेटा डिजिटल धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार हुआ।

आशाराम ने आरोप लगाया कि वालिया ने जानबूझकर मीडिया को गुमराह किया और सच्चाई छिपाई, जिससे पुलिस की छवि धूमिल हुई। उन्होंने कहा कि वालिया ने समय पर साक्ष्य जुटाने में रुचि नहीं दिखाई, मुख्य आरोपियों को पकड़ने में लापरवाही बरती और रवि, जो गवाह था, को आरोपी बना दिया। रवि ने नोटिस के तहत समय पर थाने में हाजिर होने की शर्त मानी, फिर भी उसे गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया।

चिड़ावा थानाधिकारी की मांग:

आशाराम ने रवि की कॉल डिटेल निकालने और साइबर थाने की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच की मांग की है। रवि वर्तमान में पीसी रिमांड पर है, और आशाराम ने तुरंत पूछताछ कर सच्चाई सामने लाने की अपील की है।

कार्रवाई की उम्मीद:

इस शिकायत के बाद पुलिस महानिदेशक के स्तर पर मामले की जांच शुरू होने की संभावना है। स्थानीय लोगों और पुलिस विभाग के भीतर इस घटना पर चर्चा तेज हो गई है।

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