मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह का इस्तीफा: जातीय हिंसा के 21 महीने बाद राजनीतिक उठापटक

मणिपुर: मणिपुर में जारी जातीय हिंसा के बाद मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने रविवार को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे से राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है, और अब सवाल यह उठ रहे हैं कि उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव से पहले इस्तीफा क्यों दिया।

बीरेन सिंह के खिलाफ सोमवार (आज) से शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र में अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी की जा रही थी। इस प्रस्ताव को लेकर बीजेपी के कुछ वरिष्ठ विधायक पिछले कुछ महीनों से सक्रिय थे और उन्होंने दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व के सामने सीएम बदलने की मांग भी उठाई थी।

बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद बीजेपी के भीतर भी मणिपुर में मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरूनी घमासान तेज हो गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि राज्य में शांति और स्थिरता के लिए नया नेतृत्व आवश्यक हो सकता है, खासकर तब जब राज्य में जातीय हिंसा और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी हुई है।

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मुख्यमंत्री बीरेन सिंह, जो पिछले कई महीनों से राज्य में शांति बहाल करने का दावा कर रहे थे, मीडिया के सामने यह कहते आए थे कि उनकी सरकार राज्य में शांति बहाल करने की कोशिश कर रही है और कानून-व्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है। हालांकि, राज्य में जातीय हिंसा के बढ़ते मामलों और नागरिकों की असंतोषजनक स्थिति ने उनके नेतृत्व पर सवाल उठाए थे।

बीते 21 महीनों से मणिपुर में जातीय हिंसा जारी रही है, जिसमें कई लोगों की जानें जा चुकी हैं और कई अन्य घायल हो गए हैं। यह संघर्ष मुख्य रूप से मणिपुरी समुदाय और कूकी समुदाय के बीच हुआ है, जिसके कारण पूरे राज्य में अशांति फैल गई है।

बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद अब राज्य में राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा नई नेतृत्व टीम का चयन किया जा सकता है।

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