दिल्ली में बढ़ते अपराध पर मनीष सिसोदिया का हमला: केंद्र, बीजेपी और एलजी को जिम्मेदार ठहराया
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि राजधानी में लोग भय के माहौल में जी रहे हैं। सिसोदिया ने आरोप लगाया कि बीजेपी और केंद्र सरकार दिल्ली की कानून व्यवस्था पर ध्यान नहीं दे रही हैं, जिसके कारण आम लोगों की सुरक्षा पर संकट मंडरा रहा है।
दिल्ली में बढ़ते अपराध: बेखौफ बदमाश और भयभीत जनता
मनीष सिसोदिया ने कहा, “दिल्ली के विभिन्न इलाकों से आए दिन गोलीबारी और फिरौती की घटनाएं सामने आ रही हैं। व्यापारियों को धमकाया जा रहा है, और अपराधियों का आतंक बढ़ता जा रहा है। यह सब देख ऐसा लगता है कि बीजेपी ने दिल्ली को 90 के दशक की स्थिति में वापस पहुंचा दिया है। जिस तरह से बदमाश खुलेआम घूम रहे हैं, उससे यह प्रतीत होता है कि दिल्ली की सुरक्षा के प्रति बीजेपी गंभीर नहीं है।”
सिसोदिया ने राजधानी दिल्ली में मौजूदा हालात की तुलना मुंबई में 90 के दशक के अंडरवर्ल्ड से की। उन्होंने कहा, “दिल्ली में आम आदमी खौफ में जी रहा है। शहर की स्थिति ठीक वैसी हो गई है, जैसे कि पहले मुंबई में अंडरवर्ल्ड के कारण होती थी। दिल्ली में आम लोग सुरक्षित महसूस नहीं करते। बीजेपी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि आखिर बीजेपी दिल्ली में अपराधियों को संरक्षण क्यों दे रही है?”
‘बीजेपी की जिम्मेदारी है कानून व्यवस्था बनाए रखना’
सिसोदिया ने जोर देकर कहा कि दिल्ली में कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी बीजेपी की है। उन्होंने कहा, “अगर बीजेपी दिल्ली में अपराधों को नियंत्रित नहीं कर पा रही है तो उन्हें यह जिम्मेदारी दिल्ली की आप सरकार को सौंप देनी चाहिए। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि 10 दिनों के भीतर राजधानी में कानून व्यवस्था बहाल हो जाए।”
वायु प्रदूषण पर भी केंद्र सरकार को घेरा
वायु प्रदूषण के बढ़ते मसले पर भी मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं और पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में भी कमी आई है। सिसोदिया ने कहा, “केंद्र सरकार सिर्फ अरविंद केजरीवाल और आप सरकार को निशाना बना रही है, जबकि वायु प्रदूषण पर काबू पाने के लिए उनके पास कोई ठोस रणनीति नहीं है। न तो हरियाणा सरकार और न ही उत्तर प्रदेश सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।”

