जोधपुर: गुरुवार को जोधपुर में एक ऐतिहासिक क्षण साक्षी बना, जब 964 पाकिस्तानी विस्थापितों को भारतीय नागरिकता प्राप्त हुई। जैसे ही उन्हें नागरिकता प्रमाण पत्र सौंपे गए, वहां उपस्थित अनेक लोगों की आंखें खुशी और संतोष से भर आईं। वर्षों से पहचान के इंतजार में जी रहे इन लोगों के लिए यह प्रमाण पत्र केवल एक कागज नहीं, बल्कि अस्तित्व, सम्मान और स्थायित्व का प्रतीक बन गया।

यह विशेष नागरिकता प्रमाण-पत्र वितरण शिविर डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज, जोधपुर के सभागार में आयोजित किया गया था। शिविर में जनगणना कार्य निदेशालय, राजस्थान के निदेशक विष्णु चरण मल्लिक ने प्रमाण पत्र वितरित किए। उन्होंने इसे विस्थापितों के संघर्ष, धैर्य और आशा की जीत बताया। मल्लिक ने कहा कि अब इन लोगों को किसी भी देश में पहली बार अधिकार, पहचान और जिम्मेदारी का अनुभव मिला है। उन्होंने नव नागरिकों से भारतीय संविधान के अनुरूप अपने अधिकारों और कर्तव्यों का पालन करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल ने कहा कि यह प्रमाण पत्र केवल संख्या नहीं, बल्कि 964 जीवन यात्राओं की पीड़ा, संकल्प और साहस की कहानियां हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें विस्थापित नागरिकों के पुनर्वास और समग्र कल्याण को लेकर निरंतर कार्य कर रही हैं।

अतिरिक्त जिला कलक्टर (शहर प्रथम) उदय भानु चारण ने जानकारी दी कि यह राज्य स्तरीय नागरिकता वितरण शिविर दो दिवसीय है, जो शुक्रवार 20 जून को भी जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि इस शिविर के माध्यम से 2 हजार से अधिक पाकिस्तानी विस्थापितों को भारतीय नागरिकता प्रदान की जाएगी।

शिविर में नागरिकता प्राप्त करने वाले लोगों के चेहरे पर गहरी राहत, आत्मविश्वास और गर्व साफ झलक रहा था। कई लोगों ने बताया कि वर्षों से उन्हें एक स्थायी पहचान की तलाश थी, जो अब पूरी हो गई है। अनेक लाभार्थियों ने भारत सरकार और प्रशासन के प्रति आभार प्रकट किया। यह आयोजन न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया था, बल्कि मानवता, सहानुभूति और राष्ट्र की समावेशी भावना का प्रतीक भी बना।

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