कोटा छात्र आत्महत्या: कोचिंग हब कोटा में एक बार फिर एक तैयारी करने वाले छात्र ने आत्महत्या कर ली है। घटना दादाबाड़ी थाना इलाके के वफ्फ नगर में हुई जहां सोमवार देर शाम को कोचिंग छात्र ने अपने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी। मृतक छात्र की पहचान पश्चिम बंगाल निवासी फोरिद हुसैन के रूप में हुई है। छात्र वफ्फ नगर इलाके में किराए के मकान में कमरा लेकर रह रहा था। मृतक छात्र के शव को पुलिस ने मोर्चरी में रखवा दिया है। साथ ही परिजनों को घटना की जानकारी दे दी है।

नीट की तैयारी कर रहा था छात्र

दादाबाड़ी थाना अधिकारी राजेश पाठक ने बताया कि मृतक छात्र फोरीद हुसैन कोटा में रहकर नीट की तैयारी कर रहा था। जिस मकान में छात्र रह रहा था उसमें और भी स्टूडेंट्स रहते हैं। पुलिस के मुताबिक, स्टूडेंट्स से पूछताछ में सामने आया है की शाम 4 बजे फोरिद हुसैन को छात्रों ने देखा था। इसके बाद वह 7 बजे के बाद से कमरे से बाहर नहीं निकला। उसके दोस्तों ने उसको आवाज भी लगाई लेकिन छात्र ने गेट नहीं खोला। इसके बाद इसकी जानकारी मकान मालिक को दी गई।

आत्महत्या के कारणों का नहीं हुआ खुलासा

वहीं सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई कमरे खोल कर देखा गया तो छात्र का शव फंदे से लटका था। मृतक छात्र के कमरे से पुलिस को कोई सुसाइड नोट या कोई ऐसा कागज नहीं मिला हैं ताकि आत्महत्या के कारणों बारे में कोई जानकारी मिल सके। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर छात्र ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया? वहीं पुलिस दोस्तों से भी छात्र फोरीद हुसैन की गतिविधियों के बारे में जानकारी ले रही है। पुलिस मृतक छात्र के परिजनों के कोटा पहुंचने का इंतजार कर रही है।

इस साल 26 छात्रों ने किया सुसाइड

आपको बता दें की कोटा में कोचिंग छात्रों के आत्महत्या की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। साल 2023 में जनवरी से अब तक कुल 26 छात्रों ने सुसाइड किया है। इसमें अधिकतर सुसाइड के पीछे पढ़ाई में तनाव सामने आया है। वहीं कुछ छात्रों के सुसाइड के पीछे पारिवारिक करण सामने आए हैं। ऐसे में छात्रों के सुसाइड की घटना एक चिंता का विषय जरूर बनी हुई है।

परिजनों की अपेक्षा जान पर पड़ रही भारी

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि कोटा में छात्रों की बढ़ती आत्महत्याओं के लिए कोचिंग संस्थानों को दोषी ठहराना उचित नहीं है। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना (Justice Sanjiv Khanna) की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि माता-पिता की उम्मीदें भी बच्चों को जान देने पर मजबूर कर रही हैं। अदालत ने अपनी महत्वपूर्ण टिप्पणी में यह भी कहा था कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले बच्चों बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा और उनके अभिभावकों का दबाव आत्महत्या के बढ़ते मामलों का एक कारण है।

सुप्रीम कोर्ट बोला- मां-बाप की उम्मीदें ले रहीं जान

स्त्रोत – Live Hindustan न्यूज़

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