वॉशिंगटन, अमेरिका: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार नीतियों में बड़ा बदलाव करते हुए डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ लागू करने की घोषणा की है। इस नई नीति के तहत भारत, चीन और अन्य एशियाई देशों से आयात होने वाली वस्तुओं पर भारी कर लगाया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि यह कदम अमेरिका की अर्थव्यवस्था और स्थानीय उद्योगों को बचाने के लिए उठाया गया है।
भारत और चीन को झटका, 26% और 34% टैरिफ लागू
ट्रंप प्रशासन द्वारा घोषित इस नई नीति के तहत भारत से आयातित वस्तुओं पर 26% और चीन से आयातित उत्पादों पर 34% टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा, “हमारे देश को अन्य देशों द्वारा आर्थिक रूप से लूटा गया है, अब अमेरिका अपने हितों की रक्षा करेगा।”

एशियाई देशों पर कड़ा रुख, 45% तक का टैरिफ लागू
अमेरिका ने कई एशियाई देशों पर 30% से 45% तक का टैरिफ लगाया है, जिससे इन देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
- कंबोडिया पर सबसे अधिक 49% टैरिफ लगाया गया है।
- वियतनाम से आयातित वस्तुओं पर 46% टैरिफ निर्धारित किया गया है।
- ताइवान पर 32% और जापान पर 24% टैरिफ लगाया गया है।
- इंडोनेशिया पर भी 32% कर का एलान किया गया है।
यूरोप और अन्य देशों पर भी पड़ा असर
- स्विट्जरलैंड पर 31% और यूरोपीय संघ पर 20% टैरिफ लगाया गया है।
- यूनाइटेड किंगडम को थोड़ी राहत दी गई है और वहां से आयात पर 10% टैरिफ लागू किया गया है।
- ब्रिटेन, सिंगापुर और ब्राजील पर भी 10% टैरिफ निर्धारित किया गया है।
- दक्षिण अफ्रीका को 30% टैरिफ झेलना होगा।
पाकिस्तान और बांग्लादेश पर भी प्रभाव
ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान और बांग्लादेश पर भी उच्च कर लगाए हैं, जिससे इन देशों के निर्यात पर असर पड़ सकता है।
- पाकिस्तान पर 29% टैरिफ लगाया गया है।
- बांग्लादेश से आयातित वस्तुओं पर 37% टैरिफ लागू किया गया है।

ऑटोमोबाइल उद्योग पर असर, 25% टैरिफ लागू
ट्रंप प्रशासन ने ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी कड़ा फैसला लिया है।
- ऑटोमोबाइल पर 25% टैरिफ लगाया गया है, जो 3 अप्रैल से प्रभावी होगा।
- ऑटो पार्ट्स पर यह 3 मई से लागू किया जाएगा।
ट्रंप ने कहा, “पिछले 50 वर्षों से अमेरिकी उद्योगों को नुकसान हुआ है, लेकिन अब यह खत्म होगा। इन करों के लागू होने से अमेरिकी फैक्ट्रियों में नौकरियां वापस आएंगी।”
वैश्विक बाजार में अस्थिरता की आशंका
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से वैश्विक व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- कई देशों के लिए अमेरिका को निर्यात करना महंगा हो जाएगा।
- अमेरिकी उपभोक्ताओं को कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल जैसे उत्पादों की ऊंची कीमत चुकानी पड़ सकती है।
- इस नीति के चलते अमेरिका और अन्य देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ सकता है।