महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना शिंदे गुट के प्रमुख एकनाथ शिंदे ने बुधवार को मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगाते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके मन में मुख्यमंत्री बनने की कोई लालसा नहीं है और वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लिए गए हर निर्णय को स्वीकार करेंगे।

शिंदे ने कहा, “मैं चट्टान की तरह भाजपा के साथ खड़ा हूं। सरकार बनाने में मेरी तरफ से कोई अड़चन नहीं आएगी। भाजपा की बैठक में जो भी निर्णय लिया जाएगा, वह हमें मान्य होगा। मैं भागने वाला नहीं, बल्कि समाधान निकालने वाला व्यक्ति हूं। हमने पिछले ढाई वर्षों में महाराष्ट्र के विकास की रफ्तार बढ़ाई है और हर वर्ग की भलाई के लिए काम किया है।”

पीएम मोदी और अमित शाह के प्रति आभार

एकनाथ शिंदे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा, “अमित शाह और पीएम मोदी ने बालासाहेब ठाकरे के एक आम शिवसैनिक को मुख्यमंत्री बनाने के सपने को साकार किया। उन्होंने मुझ पर विश्वास किया और बड़ी जिम्मेदारी दी। मैं आम आदमी की तरह काम करता रहा हूं। हमारे काम का नतीजा जनता के समर्थन के रूप में मिला है।”

उन्होंने आगे कहा कि महाराष्ट्र में महायुति को बहुमत मिलने के लिए वे जनता का धन्यवाद करते हैं। शिंदे ने कहा, “जनता ने महायुति पर विश्वास जताया और विकास की योजनाओं को समर्थन दिया। लाडली बहन योजना समेत हमने कई कल्याणकारी योजनाओं पर काम शुरू किया है।”

विपक्ष के सवाल और शिंदे का जवाब

महायुति में मुख्यमंत्री पद को लेकर हो रही देरी पर विपक्ष ने सवाल उठाए थे। विपक्ष का दावा था कि भाजपा जातीय समीकरण और सहयोगी दलों को संतुलित करने में समय ले रही है। साथ ही कयास लगाए जा रहे थे कि देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने की स्थिति में एकनाथ शिंदे सरकार का हिस्सा नहीं बनेंगे।

इन कयासों पर विराम लगाते हुए शिंदे ने कहा, “अगर मेरी वजह से सरकार बनाने में कोई समस्या आती है, तो पीएम मोदी और अमित शाह को किसी प्रकार का संदेह नहीं रखना चाहिए। मैं हर निर्णय के साथ खड़ा हूं।”

महायुति की ऐतिहासिक जीत

हाल ही में संपन्न महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में महायुति गठबंधन ने भारी बहुमत के साथ सत्ता बरकरार रखी। 288 सदस्यीय विधानसभा में महायुति को 230 सीटें और महाविकास अघाड़ी (एमवीए) को केवल 46 सीटें मिलीं।

  • भाजपा: 132 सीटें
  • शिवसेना (शिंदे गुट): 57 सीटें
  • एनसीपी (अजित पवार गुट): 41 सीटें
  • शिवसेना (यूबीटी): 20 सीटें
  • कांग्रेस: 16 सीटें
  • एनसीपी (शरद पवार गुट): 10 सीटें

महायुति की इस जीत ने यह साबित कर दिया कि जनता ने गठबंधन पर भरोसा बनाए रखा है।

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